डॉक्टरों और नर्सों की कमी के कारण सेक्टर-48 का अस्पताल और 334 बेड वाला पीजीआई का अस्पताल, ये दोनों ही अब तक पूरी तरह से संचालित नहीं हो सके। इन दोनों अस्पतालों की बिल्डिंगें तो बना दी गई हैं, लेकिन यहां लोगों का उपचार करने के लिये न तो मैन पॉवर है और न ही उपकरण मौजूद हैं। इन अस्पतालों के निर्माण का उद्देश्य मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना था।
आलीशान और खूबसूरत बिल्डिंग बनाने के लिए करोड़ों रुपए फूंक दिए गए हैं, लेकिन मरीजों को फायदा नहीं मिल सका है। दोनों अस्पतालों के प्रशासन ने साफ कह दिया है कि जब तक यहां मैनपॉवर नहीं आएंगी, तब तक अस्पतालों का संचालन नहीं हो सकेगा और मरीजों का उपचार भी नहीं हो पाएगा। डाक्टरों और नर्सों की भर्ती के प्रस्ताव भेजे गए हैं। अब प्रस्तावों पर कब तक मुहर लगती है, यह देखना होगा।
पीजीआई को 2500 नर्सों की जरूरत
पीजीआई में बढ़ती भीड़ को मैनेज करने के लिए करीब डेढ़ दशक पहले नेहरू हॉस्पिटल के विस्तार करने का फैसला लिया गया था। इसके लिए पीजीआई के अंदर 334 बेड का एक हॉस्पिटल बनाया गया। इसमें नेहरू हॉस्पिटल के चार बड़े डिपार्टमेंट एंडोक्राइनोलॉजी, ईएनटी, रेडियोथैरेपी और हीपेटोलॉजी को शिफ्ट करना था। इसमें से तीन शिफ्ट हो चुके हैं, लेकिन अब तक ईएनटी डिपार्टमेंट शिफ्ट नहीं हो सका है। ईएनटी का ऑपरेशन थियेटर (ओटी) अब भी नेहरू हॉस्पिटल में ही है। जब तक ओटी नए अस्पताल में शिफ्ट नहीं होंगे, तब तक ईएनटी डिपार्टमेंट के कोई मायने नहीं हैं।
बाकी डिपार्टमेंट नर्सों की कमी के कारण बेमन तरीके से चल रहे हैं। इस समय पीजीआई को करीब ढाई हजार नर्सों की जरूरत है। 1800 नर्सों की तो तत्काल जरूरत है। जब तक ये नर्सें नहीं आएंगी, तब तक 334 बेड के अस्पताल का संचालन ठीक ढंग से नहीं हो सकेगा। ऐसे में यह कहना सही नहीं होगा कि नेहरू हॉस्पिटल का विस्तार हुआ है। जो डिपार्टमेंट पुराने हॉस्पिटल से शिफ्ट किए गए हैं, उन खाली जगह का अब तक कोई इस्तेमाल नहीं किया गया है।
काम चलाऊ बना सेक्टर 48 हॉस्पिटल
सेक्टर 48 में 100 बेड के हॉस्पिटल का मकसद था कि साउथ से मेडिकल कालेज व जीएमएसएच 16 में आने वाली भीड़ को कम करना था। चंडीगढ़ प्रशासन ने बिल्डिंग बना दी, लेकिन डाक्टरों की भरती के लिए कोई प्रपोजल नहीं भेजा। बाद में भेजा गया तो वह रद्द हो गया। दबाव बढ़ा तो चंडीगढ़ प्रशासन ने काम चलाऊ नीति के तहत इसे मेडिकल कालेज को सौंप दिया।
वाह-वाही के चक्कर में मेडिकल कालेज ने हामी भर दी और चार डिपार्टमेंट मनोचिकित्सक, आंकोलॉजी, ईएनटी और स्किन डिपार्टमेंट को शिफ्ट कर दिया। लेकिन यहां भी मैनपावर की कमी की वजह से अस्पताल बिल्डिंग बन कर रह गई है। खामियों की भरमार है। ईएनटी डिपार्टमेंट को वापस सेक्टर 32 शिफ्ट कर दिया गया है। लैब टेस्ट व एक्सरे के लिए अब भी मरीजों को सेक्टर 32 जाना पड़ता है।
पूरे दिन डाक्टरों व स्टाफ को कभी सेक्टर 32 तो कभी सेक्टर 48 के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कुल मिलाकर एक तरह से मेडिकल कालेज का सेक्टर 48 में विस्तार कर दिया गया। लेकिन मरीजों का इसका कोई फायदा नहीं हुआ। सूत्रों ने बताया कि यहां पर डाक्टर व स्टाफ की कमी है। जब तक डाक्टर व नर्सें नहीं आएंगी, तब तक सेक्टर 48 संचालित नहीं हो सकेगा। बताया जा रहा है कि 200 से ज्यादा डाक्टर व स्टाफ की भरती का प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है।
सेक्टर-48 अस्पताल का मकसद सेकेंडरी स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराना था। इस अस्पताल को पूरी तरह से चलाने के लिये अतिरिक्त डॅाक्टर और स्टाफ की जरूरत है। हमने 200 से ज्यादा स्टाफ की भर्ती के लिये मंत्रालय के पास प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद है कि जल्द ही इसे मंजूरी मिल जाए। मंजूरी के बाद अस्पताल अच्छी तरह से संचालित हो सकेगा।
- अरुण कुमार गुप्ता, हेल्थ सेक्रेटरी, यूटी चंडीगढ़
334 बेड के हॉस्पिटल को चलाने के लिए हमें करीब ढाई हजार नर्सों की जरूरत है। 1500 नर्सों के प्रपोजल मंत्रालय के पास भेजे गए हैं। इसकी स्वीकृति मिलना बाकी है। ऑपरेशन थियेटर में उपकरण लगाए जा रहे हैं। जल्द ही ओटी शुरू हो जाएगी।
- प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई
पीजीआई में नर्सों की बेहद कमी है। हर नर्स पर काफी दबाव है। छुठ्टी तक नहीं मिल पा रही हैं। हमें तत्काल 1800 नर्सों की जरूरत है। साल 2012 के बाद नर्सिंग स्टाफ की भर्ती नहीं हुई है, जबकि अस्पतालों के विस्तार लगातार किये जा रहे हैं।
- सतवीर डागर, जनरल सेक्रेटरी, पीजीआई नर्सिंग एसोसिएशन