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अस्पताल को मिले डॉक्टर, मिलेगा पूरा इलाज

Fri, 22 Aug 2014 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
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पानीपत। सिविल अस्पताल के डॉक्टरों पर मरीजों का बोझ नहीं रहेगा और न ही मरीजों को डॉक्टर न मिलने पर ओपीडी में दिनभर के इंतजार के बाद बिना दवा के लौटना पड़ेगा।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से चयनित 353 डॉक्टरों में से 19 डाक्टर पानीपत के हिस्से में आए हैं। इनमें 12 एमबीबीएस और सात एमडी हैं।

ये डॉक्टर जल्द ही ज्वाइन कर सकते हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग और मरीजों को 19 डॉक्टर मिलने के बाद मरीजों को डॉक्टर नहीं मिलने और डॉक्टरों को कमी के चलते एक-दूसरे का काम देखने से राहत मिल सकेगी।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रदेश में 353 डॉक्टरों की भर्ती की गई है और हर जिले में डॉक्टरों को जरूरत अनुसार लिस्टेड कर दिया है। जिले में इस भर्ती में 12 एमबीबीएस व सात एमडी समेत 19 डॉक्टर मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चयनित डॉक्टरों के स्टेशन जारी कर दिए हैं और इन डॉक्टरों के जल्द ही ज्वाइन करने का अनुमान है।
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सिविल अस्पताल में फिजिशियन और हड्डी रोग विशेषज्ञ लंबे समय से नहीं थे। ऐसे में कई बार ओपीडी के लिए आने वाले मरीजों की पर्ची तक नहीं बनाई जाती थी। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की भी हालत ऐसी ही होती थी।

उनको हड्डी टूटने की संभावना नजर आते ही पीजीआई खानपुर या रोहतक रेफर कर दिया जाता था। गत दिनों की डॉक्टर प्रदीप और डॉ. सौरभ ने ज्वाइन किया है। जिसके चलते इन बीमारियों के मरीजों को कुछ राहत मिली है।  

अस्पताल में हैं आधे से कम डॉक्टर
सिविल में 45 डॉक्टरों का स्टाफ होना चाहिए, लेकिन यहां पर मात्र 20 डॉक्टर हैं। आधे से कम डॉक्टर में सिविल अस्पताल की इमरजेंसी और ओपीडी को चला पाना काफी मुश्किल भरा था। कई बार ओपीडी के डॉक्टर की इमरजेंसी में ड्यूटी लगाने पर मरीज वहीं पर चले पहुंच जाते थे। ऐसे में डॉक्टर इमरजेंसी के साथ ओपीडी के मरीजों को देख पाने में असमर्थ हो जाता था।

ऐसे में इमरजेंसी वाले मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता था। इसके चलते कई बार मरीजों और डॉक्टरों के बीच कहासुनी भी हो जाती थी।

अगस्त माह के 20 दिन के आंकड़ों पर नजर डाले तो इमरजेंसी में आने वाले 417 मरीजों में से 276 मरीजों को पीजीआई खानपुर और रोहतक रेफर किया गया। ऐसे में सिविल अस्पताल पूरी तरह से रेफरल सेंटर बन गया था। इसका एक बड़ा कारण स्पेशलिस्ट डाक्टर का न होना है। इमरजेंसी में कई बार डॉक्टर के व्यस्त होने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मी को ही औजार उठाने पड़ते थे।

मेडिकल आफिसर डॉ. भूपेश चौधरी कान, नाक और गला रोग विशेषज्ञ। डॉ. मोना नागपाल मनोरोग विशेषज्ञ, डॉ. सुखदीप कौर महिला रोग, डॉ. शालिनी मेहता नेत्र रोग, डॉ. शालिनी मित्तल नेत्र रोग, डॉ. राघवेंद्र चमड़ी रोग, डॉ. प्रदीप हुड्डी रोग, डॉ. आलोक जैन शिशु रोग, डॉ. एसके गुप्ता नेत्र रोग, डॉ. अमित वर्मा फिजिशियन, डॉ. सौरभ, फिजिशियन, डॉ. योगेश, संजीव गोयल, डॉ. विजय मलिक सर्जन, डॉ. प्रीति भाटिया और डा. श्याम लाल माइक्रोबायोलाजिस्ट और डॉ. नताशा एमबीबीएस हैं।  

सिविल अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक मरीजों की हालत चिंताजनक होती थी। डॉक्टरों के कोर्ट केस या दूसरी ड्यूटियों में जाने के बाद ओपीडी में डॉक्टर नहीं मिल पाते थे। ओपीडी के मरीजों को कई बार पूरा दिन तक डाक्टरों का इंतजार करना पड़ता था। ऐसी स्थिति में उनको दवा बिना ही वापस लौटना पड़ता था। ओपीडी में तो सुबह ही मरीजों की लंबी कतार डाक्टरों के बाहर लग जाती है। इमरजेंसी में भी मरीजों को डॉक्टर की कमी में दिक्कत उठानी पड़ती थी।

जिला स्वास्थ्य विभाग को इस बार 19 डॉक्टर मिले हैं। इनमें 12एमबीबीएस और सात एमडी हैं। जिले में नए डॉक्टर जल्द ही ज्वाइन कर लेंगे और अस्पताल से लेकर पीएचसी और सीएचसी में डॉक्टर की कमी दूर हो सकेगी।
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डॉ. इंद्रजीत सिंह धनखड़, सीएमओ पानीपत
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