शोध में सामने आया
शोध में पाया गया कि जिन मरीजों को दवाइयों के साथ घर का बना पौष्टिक भोजन दिया गया, उनमें लीवर की रिकवरी तेजी से हुई और उनकी मृत्यु दर सामान्य इलाज करा रहे मरीजों की तुलना में 30 प्रतिशत तक कम हो गई। पीजीआई के इस महत्वपूर्ण शोध को प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ क्लिनिकल गैस्ट्रोलॉजी इंट्रोलॉजी हेपेटोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।
उच्च प्रोटीन युक्त आहार फायदेमंद
शोध के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर हेपेटोलॉजी विभाग के डॉ. सुनील तनेजा ने कहा कि आमतौर पर यह माना जाता है कि लीवर के मरीजों को ज्यादा खाना नहीं खाना चाहिए, लेकिन यह सच नहीं है। अगर लीवर के मरीजों को अच्छा और पौष्टिक भोजन दिया जाए तो दवाइयों का असर और भी बेहतर हो सकता है। एल्कोहलिक लीवर डिजीज के मरीजों के लिए उच्च प्रोटीन युक्त आहार विशेष रूप से फायदेमंद है, क्योंकि शराब की लत के कारण अक्सर उनमें खाने की इच्छा कम हो जाती है, जिससे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। इस स्थिति को एक्यूट क्रॉनिक लीवर फेलियर कहा जाता है, जिसे केवल दवाइयों से नियंत्रित करना मुश्किल होता है।
डॉ. तनेजा ने बताया कि ऐसी स्थिति में शराब छोड़ने के साथ मरीजों को उच्च प्रोटीन और उच्च कैलोरी वाला भोजन करने की सलाह दी जाती है। यह खराब हुई मांसपेशियों को फिर से ताकत देता है और लीवर के कार्यों में सुधार लाता है।
इस प्रकार, मृत्यु दर को कम करने के साथ-साथ मरीजों को बार-बार अस्पताल आने की आवश्यकता भी कम हो जाती है। घर पर बने उच्च प्रोटीन युक्त आहार के सेवन से बीमारी का स्कोर तेजी से नीचे आने लगता है। ऐसे मरीजों को बादाम, पनीर, अंडा, दाल और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थ देने की सलाह दी जाती है।
शराब युवाओं का लीवर कर रहा खराब
डॉक्टरों ने युवाओं में लीवर की समस्याओं में तेजी से वृद्धि पर चिंता जताई है। ऐसे मामलों में लगभग 80 प्रतिशत का कारण शराब का सेवन पाया गया है। उनका कहना है कि यह एक गंभीर चिंता का विषय है कि युवा पीढ़ी नशे के कारण अपने स्वास्थ्य को तेजी से बर्बाद कर रही है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो लीवर के मरीजों की संख्या में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पीजीआई की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या 250 से बढ़कर 700 तक पहुंच गई है।