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Loksabha Election: हरियाणा में अमित शाह ने भूपेंद्र हुड्डा को निशाने पर लिया, गैर जाट वोटरों को साधने की कोशिश

Tue, 21 May 2024 01:28 PM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

चुनावी विश्लेषक कहते हैं कि हरियाणा में रैलियों में भूपेंद्र हुड्डा का नाम लेकर शाह ने एक तरह से गैर जाट वोटरों को साधने का प्रयास किया है। शाह की सोच है कि हुड्डा पर जितना वह आक्रमण करेंगे, उतना गैर जाट वोटों का वह ध्रुवीकरण कर पाएंगे। हालांकि वह इसमें कितना कामयाब हो पाते हैं, यह तो चार जून को पता चल सकेगा।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भाजपा का चाणक्य कहा जाता है। वह अपनी रैलियों में जब किसी को निशाने पर लेते हैं तो उसके पीछे उनकी एक रणनीति होती है। सोमवार को शाह ने हरियाणा में तीन जगह रैलियां कीं और तीनों जगह उन्होंने कांग्रेस के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर जमकर निशाना साधा। उन पर भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोप भी लगाए। 

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हालांकि दो दिन पहले हरियाणा में भाजपा उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने आए पीएम मोदी ने किसी का नाम लिए बिना ही विपक्ष को निशाने पर लिया था। चुनावी विश्लेषक कहते हैं कि मौजूदा समय में हुड्डा ही कांग्रेस का चेहरा हैं। राज्य के चुनावी रण में अधिकतर सीटों पर उनके खेमे के ही उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में कांग्रेस की ओर से हुड्डा ही एक ऐसा नेता हैं, जो अधिकतर लोकसभा सीटों पर जाकर उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं। लिहाजा शाह अच्छी तरह से जानते हैं कि हुड्डा को निशाने पर लेने से कई मोर्चों पर धुव्रीकरण का फायदा मिल सकता है।

पहला, हुड्डा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने से इसका असर कांग्रेस के उम्मीदवारों पर भी पड़ेगा। उन्होंने हिसार में आरोप लगाते हुए कहा- प्रदेश की कई एकड़ भूमि को उन्होंने कांग्रेस के दामाद को दान में दे दी। उन्हें प्रदेश की जनता से कोई मतलब नहीं था। ये प्रदेश को लूट रहे थे, लेकिन जब प्रदेश में भाजपा की मनोहर लाल सरकार आई तो सबसे पहले भ्रष्टाचार को खत्म किया। वहीं, हुड्डा को जाट वोटरों का जबरदस्त समर्थन प्राप्त है। इसके उलट अधिकतर इलाकों में जाट भाजपा से नाराज चल रहे हैं। ऐसे में रैलियों में हुड्डा का नाम लेकर कहीं न कहीं उन्होंने गैर जाट वोटरों को साधने की
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कोशिश की है। 

चुनावी विश्लेषक डा. सतीश त्यागी कहते हैं कि भाजपा जाट वोटों पर सेंध नहीं लगा पा रही है। डॉ. त्यागी कहते हैं कि हरियाणा में भाजपा का मुकाबला कांग्रेस से नहीं बल्कि हुड्डा से है। इसलिए शाह के सामने हुड्डा नाम लेना उनकी मजबूरी भी है।

डबल इंजन सरकार के फायदे गिना गए शाह
भाजपा हमेशा से डबल इंजन सरकार की हिमायती रही है। इसलिए शाह ने इशारों में डबल इंजन सरकार के फायदे गिना गए। उन्होंने कहा- जब मोदी केंद्र में आए तो हरियाणा में विकास की गंगा बहा दी। मोदी ने हरियाणा को 2 लाख 70 हजार करोड़ रुपया दिया। जबकि कांग्रेस की सरकार में राज्य को सिर्फ 41 हजार करोड़ रुपया मिला। वहीं, केंद्र के साथ मिलकर राज्य ने हरियाणा को विकास के पथ में एक बड़ी पहचान दी है। पूर्व सीएम मनोहर लाल ने हरियाणा को 10 साल में विकसित हरियाणा बनाने का काम किया है। हरियाणा में पिछली सरकारों में नौकरी बेचने का कारोबार चलता था, मनोहर लाल ने उसे पूरी तरह खत्म कर दिया। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हरियाणा ने काफी काम किया है। कई मेडिकल कॉलेज खुले हैं। एम्स भी आया है।

खिलाड़ी-किसान-जवान को साधने की कोशिश
शाह ने हरियाणा के खिलाड़ियों, किसानों और जवानों को भी साधने की कोशिश की। तीनों ही वर्ग के मतदाता बहुतायत में हैं। हरियाणा के सैनिकों का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा-हरियाणा के जवान सीमा पर तैनात हैं और आज उन्हीं के कारण हम चैन की नींद सोते हैं। किसानों का जिक्र करते हुए कहा-किसानों के हित में मोदी सरकार ने अनेक योजनाएं चलाई। आज अगर अनाज के मामले में देश आत्मनिर्भर है तो उसके पीछे भी हरियाणा की भूमिका है। किसानों के आंदोलन को देखते हुए उन्होंने कहा- भाजपा की सरकार ने किसानों का अनाज एमएसपी पर खरीदा है। वहीं, खिलाड़ियों के बारे में उन्होंने कहा-मोदी ने खेलों का बजट तीन गुना बढ़ाया। स्टेडियम बनाए, खिलाड़ियों का मानदेय बढ़ाया। अब 2036 में ओलंपिक खेल भी भारत में खेले जाएंगे।

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