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अलविदा... भारतीय हॉकी के ‘सीनियर’, बलबीर सिंह के पार्थिव शरीर के साथ रखी गई हॉकी स्टिक

Tue, 26 May 2020 01:22 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • सेक्टर-25 के इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में पूरे सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
  • पंजाब के खेल मंत्री समेत कई दिग्गज रहे मौजूद
  • राजनीति, चिकित्सा और खेल जगत की हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
  • कनाडा में रहने वाले तीनों बेटे नहीं पहुंच सके, बेटी और नाती रहे मौजूद
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बलबीर सिंह सीनियर।
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विस्तार
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हॉकी लीजेंड और तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट बलबीर सिंह सीनियर अब इस दुनिया में नहीं रहे। भारतीय हाकी के एक युग का सोमवार को अंत हो गया। पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर (96) सांस की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में सुबह 6.17 बजे अंतिम सांस ली। बलबीर सिंह सीनियर को सांस लेने में तकलीफ के बाद बीते 8 मई को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टर लगातार उनकी देखभाल में जुटे हुए थे, लेकिन उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

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इस दौरान उन्हें तीन बार दिल का दौरा भी पड़ा था। उनका कोरोना टेस्ट भी कराया गया, जिसकी रिपोर्ट नेगिटिव आई थी। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने की खबर परिवार वालों के लिए सुखद रही, लेकिन इसके कुछ समय बाद ही वह बेहोश हो गए। उनके दिमाग की एमआरआई कराई गई। रिपोर्ट में उनके दिमाग में ब्लड क्लॉट जमा होना बताया गया था। इसके बाद उनकी तबीयत लगातार गंभीर बनी हुई थी।  उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

पूर्व ओलंपियन व हॉकी लीजेंड पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर के निधन से पंजाब समेत पूरी ट्राइसिटी शोक में डूब गई। प्रशंसकों, हॉकी के दिग्गज खिलाड़ियों समेत खेल जगत के कई दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि भेंट की। सोमवार शाम को सेक्टर-25 के इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनकी जान से प्यारी हॉकी स्टिक को भी उनके पार्थिव शरीर के साथ रखा गया।
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निधन के बाद दोपहर 2.40 बजे बलबीर सिंह सीनियर का पार्थिव शरीर मोहाली स्थित फोर्टिस अस्पताल से सेक्टर-36 स्थित उनके निवास पर लाया गया। इस दौरान एंबुलेंस के आगे-पीछे पंजाब पुलिस की गाड़ियां एस्कार्ट कर रही थीं। शव को घर के अंदर रखा गया और अरदास की गई। बेटी सुशबीर कौर समेत अन्य परिजनों उन्हें श्रद्धांजलि दी। बलबीर सिंह के तीनों बेटे कनाडा में रहते हैं, इसलिए वह अंतिम संस्कार में नहीं पहुंच सके। सेक्टर-25 स्थित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह पहुंचकर कई दिग्गजों ने हॉकी लीजेंड को श्रद्धांजलि दी। 

इनमें प्रमुख रूप से पंजाब सरकार के मौजूदा मंत्री, पूर्व मंत्री और खेल जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी, पूर्व अकाली भाजपा सरकार के पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढिंढसा, पूर्व ओलंपियन प्रगट सिंह, पीजीआई चंडीगढ़ के डायरेक्टर जगतराम मौजूद रहे। हॉकी चंडीगढ़, यूटी डॉयरेक्टर स्पोटर्स की ओर से भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अंतिम संस्कार के मौके पर बलबीर सिंह सीनियर के नाती कबीर, बेटी सुशबीर कौर के साथ कुछ ही लोग ही मौजूद रहे। 

नाती कबीर ने जारी किया संदेश

बलबीर सिंह सीनियर को दी गई आखिरी सलामी। - फोटो : अमर उजाला
बलबीर सिंह सीनियर के नाती कबीर ने एक संदेश में कहा, नानाजी का सुबह निधन हो गया। सीनियर चंडीगढ़ सेक्टर -36 में अपनी बेटी सुशबीर कौर और नाती कबीर के साथ रहते थे। बलबीर सिंह के पिता दिलीप सिंह दोसांझ स्वतंत्रता सेनानी थे। बलबीर सिंह की पत्नी सुशील लाहौर की रहने वाली थी, जिनके साथ उनका विवाह 1946 में हुआ था। उनके एक बेटी सुशबीर, तीन बेटे कंवलबीर, करनबीर और गुरबीर है, जो अब कनाडा में सेटल हैं।

पीजीआई से 101 दिन बाद लौटे थे घर
बलबीर सिंह सीनियर पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। पिछले साल वह 101 दिन पीजीआई में भर्ती रहे थे। यहां पर वह जिदंगी की जंग जीत कर वापस अपने घर लौटे थे। इसके बाद से उन्हें घर पर अलग कमरे में रखा गया था, जहां पर स्वास्थ्य कर्मी उनकी देखरेख करता था। पिछले दो साल में चौथी बार उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। पिछले साल जनवरी में वह फेफड़ों में निमोनिया के कारण तीन महीने अस्पताल में रहे थे।

खेल मंत्री बोले- हमें छोड़कर चला गया खेल जगत का सितारा
बलबीर सिंह सीनियर के पार्थिव शरीर पर हॉकी भी रखी गई थी। शाम 5.42 बजे पर इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके शरीर के साथ हॉकी भी इलेक्ट्रानिक यंत्र के अंदर चली गई। इस मौके पर पहुंचे पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने कहा खेल जगत का सितारा आज चला गया। वह पिछले दो साल से बीमारी से लड़ रहे थे। इस मौके पर पीजीआई के डायरेक्टर जगतराम ने कहा कि बलबीर सिंह एक फाइटर की तरह थे। वह पहले पीजीआई में भी भर्ती रहे थे। वह एक महान खिलाड़ी थे।

नहीं कर सके जिदंगी का शतक पूरा, 2006 में मिला था श्रेष्ठ सिख हॉकी प्लेयर का खिताब

यह भी संयोग है कि भारतीय हॉकी में पितामह का दर्जा हासिल करने वाले बलबीर सिंह सीनियर ने पिछले साल ही अपना 95वां जन्मदिन परिवार के साथ मनाया था। सीनियर बेहद जिंदादिल और दृढ़ इच्छा शक्ति के धनी थे। भारतीय हॉकी में उनका कद हॉकी के जादूगर ध्यानचंद से कम नहीं माना जाता है। साल 2006 में उन्हें श्रेष्ठ सिख हॉकी प्लेयर करार दिया गया था।

1975 वर्ल्ड कप में अहम भूमिका
बतौर मैनेजर रहते हुए बलबीर सिंह सीनियर ने अपनी कोचिंग में भारतीय टीम को 1975 वर्ल्ड कप चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई। यह उनके अनुशासन और सख्त ट्रेनिंग का असर था कि गगन अजीत सिंह की अगुवाई में भारतीय टीम इतिहास रचने में सफल रही। टीम की तैयारी भी उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में कराई थी। 

तीन बार ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे
तीन बार ओलंपिक गोल्ड जीतने वाली हॉकी टीम का हिस्सा बलबीर सिंह लंदन ओलंपिक 1948, हेलिंसकी ओलंपिक 1952 और मेलबर्न ओलंपिक 1956 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। 1952 ओलंपिक खेलों में बलबीर सिंह सीनियर ने नीदरलैंड के खिलाफ पांच गोल कर भारत को 6-1 से जीत दिलाई थी। बलबीर सिंह विश्व कप 1971 में कांस्य और विश्व कप 1975 जीतने वाली भारतीय टीम के मुख्य कोच थे।

भारतीय हॉकी टीम के कप्तान व कोच भी रहे
भारतीय हॉकी के स्तंभ माने जाने वाले बलबीर सिंह सीनियर के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। पहले भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी फिर कप्तान और कोच की भूमिका निभा चुके बलबीर सिंह सीनियर का नाम हॉकी जगत में बड़े सम्मान और आदर के साथ लिया जाता था। हॉकी के मैदान पर गोल करने की उनकी कला के देश ही नहीं विश्व के खिलाड़ी कायल रहे हैं। वह चंडीगढ़ के सेक्टर-36 स्थित मकान नंबर 1067 में अपनी बेटी सुशबीर कौर और नाती कबीर के साथ रहते थे।

इन खेल महाकुंभों में लिया था भाग
  • 1948 लंदन ओलंपिक                      
  • 1952 हेलिंसकी ओलंपिक                     
  • 1956 मेलबर्न एशियाई खेल  (रजत पदक विजेता)                       
  • 1958 टोक्यो ओलंपिक 

मुख्यमंत्री की तरफ से खेल मंत्री राणा सोढी ने किया माल्यार्पण

अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टार और पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर का अंतिम संस्कार सोमवार को स्थानीय विद्युत श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। चिता को अग्नि उनके पोते कबीर सिंह ने दी। इस मौके पर बलबीर सिंह सीनियर की बेटी सुशबीर कौर भी उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब के खेल मंत्री राणा गुरमीत सिंह सोढी ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से देह पर माल्यार्पण किया। पंजाब पुलिस की टुकड़ी ने हथियार उलटे कर और हवा में फायर कर इस महान हॉकी स्टार को श्रद्धांजलि भेंट की।

इस समय, विधायक व ओलंपियन परगट सिंह और परमिंदर सिंह ढींडसा ने भी फूल मालाएं अर्पित कर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि भेंट की। पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक की तरफ से चंडीगढ़ के एडीसी सचिन राणा ने फूल-मालाएं भेंट की।  हॉकी इंडिया, पंजाब ओलंपिक एसोसिएशन और हॉकी पंजाब के नुमायंदों ने भी फूल-मालाएं अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।  इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में राणा सोढी ने कहा कि मोहाली के अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम का नाम बलबीर सिंह सीनियर के नाम पर रखा जाएगा, जिसका औपचारिक तौर पर उद्घाटन पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह उचित समय आने पर करेंगे। 

अंतिम संस्कार के मौके पर बलबीर सिंह सीनियर को श्रद्धांजलि भेंट करने के लिए प्रमुख सचिव हुसन लाल, डायरेक्टर (खेल) संजय पोपली, मोहाली के डिप्टी कमिश्नर गिरिश दयालन, नगर निगम चंडीगढ़ के कमिश्नर और सचिव (खेल) यूटी केके यादव, डायरेक्टर (खेल) यूटी तेजवीर सैनी और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के अलावा पारिवारिक सदस्य, दोस्त और प्रशंसकों ने इस हॉकी स्टार को नम आंखों के साथ अंतिम विदाई दी।

बलबीर सिंह सीनियर एक नजर

  • जन्म स्थान : हरिपुर खालसा, पंजाब, ब्रिटिश भारत
  • घरेलू टीम : पंजाब पुलिस
  • पोजिशन : सेंटर फॉरवर्ड
  • अंतरराष्ट्रीय पर्दापण : मई 1947
  • अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच : मई 1958
  • ओलंपिक : लंदन 1948 (गोल्ड), हेलसिंकी 1952 (गोल्ड), मेलबर्न (1956) (गोल्ड)
  • 1958 टोक्यो एशियाई खेलों में रजत पदक
  • 1947 में भारत के श्रीलंका दौरे पर की अंतरराष्ट्रीय करिअर की  शुरुआत
  • ओलंपिक में अपने पहले ही मुकाबले में लंदन में अर्जेंटीना के खिलाफ दागे छह गोल
  • फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ दो गोल किए। भारत 4-0 से जीता जो आजाद देश का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक था
  • 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में भारतीय ध्वजवाहक बने
  • भारत ने हेलसिंकी में कुल 13 गोल किए, जिनमें से नौ अकेले बलबीर की स्टिक से निकले। इसमें ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ हैट्रिक भी शामिल थी
  • 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में टीम की कप्तानी की और भारतीय ध्वजवाहक भी रहे
  • 1975 की विश्व कप विजेता टीम के मैनेजर थे
  • 1982 में नई दिल्ली में हुए एशियाई खेलों की मशाल जलाने का सम्मान मिला
  • 1997 में उनकी आत्मकथा द गोल्डन हैट्रिक प्रकाशित
  • 2008 में दूसरी किताब द गोल्डन यार्डस्टिक : इन क्वेस्ट ऑफ हॉकी एक्सीलेंस प्रकाशित
  • 2019 में पंजाब सरकार ने महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से सम्मानित किया

दुनियाभर में गोल मशीन के नाम से थे मशहूर

बलबीर सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1924, हरिपुर खालसा में हुआ। इनके पिता दलीप सिंह दोसांज स्वतंत्रता सैनानी थे। पत्नी स्वर्गीय सुशील कौर लाहौर की थीं। बलबीर सिंह सीनियर ने अपनी पढ़ाई देव समाज हाई स्कूल मोगा, डीएम कॉलेज मोगा, नेशनल कॉलेज लाहौर, खालसा कॉलेज अमृतसर से की। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे से पहले लाहौर मे पंजाब यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और हॉकी टीम का नेतृत्व किया।

भारत ने हॉकी में ओलंपिक लंदन (1948), हेल्सिंकी (1952) और मेलबोर्न (1956) में गोल्ड मेडल जीता था, खास बात यह है कि इन तीनों टीमों में बलबीर सिंह सीनियर मेडल विजेता टीम के हिस्सा थे। साल 1948 के लंदन ओलंपिक में अर्जेंनटीना के खिलाफ उन्होंने 6 गोल दागे थे, इस मैच में भारत 9-1 से जीता था। इसी ओलंपिक के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 4-0 से हराया था, इस मैच में उन्होंने पहले 15 मिनट में दो गोल कर थे।

हेल्सिंकी ओलंपिक के फाइनल मैच में उन्होंने हॉलैंड के खिलाफ फाइनल मैच 5 गोल दागे थे। जिसका रिकॉर्ड आज भी गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है। साल 1954 में सिंगापुर टूर पर गई टीम इंडिया ने कुल 121 गोल किए थे, जिसमें 84 गोल अकेले बलबीर सिंह सीनियर के थे। साल 1955 में न्यूजीलैंड -आस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया ने 203 गोल किए, जिसमें 121 गोल बलबीर सिंह सीनियर के थे, यह वह दौर था, जब वर्ल्ड मीडिया ने उनके नाम के साथ गोल मशीन लगाना शुरू कर दिया था।

यह मिले थे अवॉर्ड
साल 1957 में पदमश्री पाने वाले पहले भारतीय। साल 2006 में बेस्ट सिख खिलाड़ी का अवॉर्ड, लंदन ओलंपिक 2012 में उन्हें सदी के बेहतरीन खिलाड़ियों में चयनित किया गया। यह सम्मान पाने वाले वह एशिया में इकलौते खिलाड़ी थे। साल 2015 में उन्हें मेजर ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला। साल 2019 महाराजा रणजीत सिंह खेल अवार्ड। बलबीर सिंह सीनियर ने हॉकी के विषय पर दो किताबें भी लिखी थी। इनमें गोल्डन हैट्रिक और दूसरी द गोल्डन यार्ड स्टिक शामिल हैं।  

इंग्लैंड की धरती पर लहराया था तिरंगा  
आजाद हिंदुस्तान के बाद पहली बार भारत के झंडे तले 1948 में लंदन ओलंपिक हुई तो फाइनल में भारत ने अंग्रेजों को उनकी ही धरती पर 4-0 से करारी हार दी थी। इस जीत में बलबीर सिंह के दो गोल शामिल रहे। जीत के बाद पहली बार इंग्लैंड की धरती पर भारतीय झंडा लहराया गया था। झंडे लहराते देख बलबीर सिंह काफी भावुक हो गए थे और उनकी आंखों में आंसू भी आए गए थे।
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खालसा कॉलेज अमृतसर से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी हॉकी लीजेंड ने

हॉकी लीजेंड बलबीर सिंह सीनियर ने अपनी उच्च पढ़ाई खालसा कॉलेज अमृतसर से की थी। वह खालसा कालेज में वर्ष 1942 से 1945 तक बीए के छात्र रहे। हॉकी की प्राथमिक शुरूआत कालेज के खेल मैदान से की थी। यह जानकारी सोमवार को खालसा कॉलेज गवर्निंग काउंसिल के ऑनरेरी सचिव राजिंदर मोहन सिंह छीना ने दुख प्रकट करते हुए दी।

उन्होंने कहा कि वह भारत के सबसे अधिक अवॉर्डोें से सम्मानित एथलीट थे। जिनके ओलंपिक में बनाए गए रिकॉर्ड आज तक भी कायम हैं। भारतीय हाकी टीम के कप्तान, कोच, मैनेजर के रूप में उनकी महान उपलब्धियों के फलस्वरूप उनको पदमश्री अवॉर्ड से नवाजा गया था। इतना ही नहीं इस दौरान खालसा कॉलेज गवर्निंग कौंसिल, प्रिंसिपल, स्टाफ और विद्यार्थियों ने गहरे दुख का इजहार करते हुए उनको श्रद्धा के फूल अर्पित किए।

उन्होंने तीन गोल्ड मेडल अपने नाम किए, जिनमें लंदन 1948, हेलंसिकी 1952 उप कप्तान के रूप में और मेलबोर्न 1956 कप्तान के रूप में ओलंपिक में भारत की जीत में मुख्य भूमिका निभाई थी। जिनको ऑल टाइम महान हॉकी खिलाड़ियों में से एक माना जाता था। इसलिए हमेशा बलबीर सिंह सीनियर कहा जाता था, ताकि उनकी दूसरे भारतीय हॉकी खिलाड़ियों से अलग पहचान उभर सके।
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