चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 के ईएनटी विभाग के प्रमुख की ओर से एचआईवी के मरीज की सर्जरी करने से इन्कार करने का मामला सामने आया है। नाक में गंभीर परेशानी होने के चलते मरीज पिछले तीन महीने से अस्पताल के चक्कर काट रहा था लेकिन विभाग प्रमुख ने उसे सर्जरी से जुड़ी सभी जांच और अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंत में यह कहकर लौटा दिया कि सर्जरी के मानक लेकर आओ तभी सर्जरी होगी। परेशान मरीज ने इसकी शिकायत डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रो. एके अत्रि और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुधीर गर्ग से की। इसे गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रशासन ने ईएनटी के विभाग प्रमुख को मरीज की सर्जरी करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मरीज को सर्जरी की डेट दी गई है।
डॉक्टरों का कहना है कि सर्जन मरीज से सर्जरी के मानक कैसे मांग सकता है। सर्जन बनने के दौरान ही सभी मानक ठीक से समझने होते हैं। आखिर एचआईवी के मरीज से सर्जरी के मानक मांगने का क्या मतलब है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर डॉक्टर ने मरीज को लौटाया है तो इससे पहले वह बिना मानक के कैसे सर्जरी कर रहे थे। वहीं, अगर ये पहला लौटाया गया मरीज है तो इसके साथ ऐसा क्यों किया गया। ईएनटी के विभाग प्रमुख डॉ. रोशन कुमार वर्मा का कहना है कि पिछले वर्ष एचआईवी के मरीज को लेकर हुई एक घटना के बाद उन्होंने मानकों की मांग की थी क्योंकि उन्हें इस बात का डर था कि कोई चूक होने पर अस्पताल प्रशासन फिर उन्हें दोषी बना देगा इसलिए बचाव के लिए उन्होंने मरीज को कहा था कि अस्पताल प्रशासन से मानक लिखवाकर लाए, तब सर्जरी करूंगा।
एचआईवी मरीज को लेकर लगातार हो रही लापरवाही : इससे पहले सितंबर 2023 में जीएमसीएच 32 के ईएनटी विभाग के डॉक्टर पर एचआईवी टेस्ट को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई थी। इसमें जांच रिपोर्ट की अनदेखी कर ईएनटी विभाग के डॉक्टर ने एक एचआईवी संक्रमित बच्ची की सर्जरी बिना बचाव के मानकों का पालन करते हुए कर दी थी। सर्जरी के बाद जांच रिपोर्ट में एचआईवी की पुष्टि हुई थी। सर्जरी में शामिल पैरामेडिकल स्टाफ ने संक्रमण की आशंका जताते हुए इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से शिकायत की थी। जिसके बाद जांच कमेटी गठित की गई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उस मरीज के माता-पिता की भी एचआईवी जांच की गई थी। उसके माता-पिता को सोमवार को पीजीआई के एआरटी सेंटर रेफर कर दिया गया था।