मनीमाजरा। यह चंडीगढ़ का सबसे बड़ा कस्बा है। इसका अपना 600 साल पुराना इतिहास है। यह 48 गांव की एक रियासत थी, जिसके सात राजा हुए हैं। अंतिम राजा भगवान सिंह थे। चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी के तौर पर 1950 में बनना शुरू हुआ और चंडीगढ़ में दो फेस मनीमाजरा रियासत के 28 गांव को लेकर बसाया गया। मनीमाजरा, मौलीजागरां और दड़वा गांव की लगभग तीन हजार बीघा जमीन अधिग्रहित कर चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन बनाया गया। अप्रैल 1976 में नोटिफाइड एरिया कमेटी (एनएसी) बनाकर मनीमाजरा को शहरी एरिया घोषित किया गया। यही एनएसी मई 1994 नगर निगम चंडीगढ़ में मर्ज हो गई। नगर निगम भी मनीमाजरा से शुरू हुआ और कमिश्नर का दफ्तर यहीं से काम करता था। देखते ही देखते यहां चंडीगढ़ वर्ल्ड क्लास शहर बना गया। हालांकि मनीमाजरा चंडीगढ़ का अहम हिस्सा है, लेकिन इसका विकास चंडीगढ़ बराबर नहीं हुआ। मूलभूत सुविधाओं की कमी आज भी बहुत खटक रही हैं।
-सुरेंद्र सिंह, पूर्व मेयर नगर निगम
चंडीगढ़ मॉडर्न शहर बना, मगर उसका अहम हिस्सा मनीमाजरा की हालत खराब
चंडीगढ़ बनने से पहले मनीमाजरा का अपना एक इतिहास था। चंडीगढ़ को बसाते वक्त उस जगह उजाड़े गए लोग मनीमाजरा में पांच-छह जगह बसाए गए थे। 1977 तक यह पंचायती राज रहा। तब से लेकर 1995 तक एनएसी कमेटी ने चंडीगढ़ की तरह मनीमाजरा विकास किया। एनएसी कमेटी ने एरिया की सबसे बड़ी मोटर मार्केट यहां बनाई। यहीं पर सबसे पॉश इलाका शिवालिक एनक्लेव बनाया। एनएसी द्वारा ही पॉकेट नंबर- 1 से लेकर आठ तक जमीन अधिग्रहित कर उसमें शांति नगर, सुभाष नगर, बैंक कॉलोनी, न्यू दर्शनी बाग और इंदिरा कॉलोनी मॉर्डन कांप्लेक्स तो बसा दिया लेकिन 1995-96 में नगर निगम बनने के बाद मनीमाजरा का सारा विकास कार्यक्रम बंद हो गया। नगर निगम ने चंडीगढ़ को एक खूबसूरत शहर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लोगों इस शहर को देखने के लिए पूरी दुनिया से आते हैं, लेकिन मनीमाजरा के हालात दिन-ब-दिन खराब होती चली गई। जबकि एक रियासत होने के साथ-साथ मनीमाजरा चंडीगढ़ का अहम हिस्सा है।
-रामेश्वर गिरि, समाज सेवी