आखिरकार, पिंजौर गार्डन स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक भीमा देवी मंदिर परिसर में बने म्यूजियम का ताला खोल दिया गया। 9 वीं से 11वीं शताब्दी की वास्तुकला एवं मूर्तिकला लोगों को दिखाने के लिए पंचायतन शैली में इस म्यूजियम का निर्माण करवाया गया था, लेकिन लापरवाही के कारण यह नाम का ही म्यूजियम रह गया था।
इस म्यूजियम पर महीनों से ताला लटका था और सैलानियों को बैरंग ही लौटना पड़ता है। भीमा देवी मंदिर देश के सबसे पुराने खंडहरों में से एक है और भारतीय वास्तुकला का एक जीता-जागता उदाहरण है।
मुगल काल के दौरान आक्रमणकारियों ने इसे बर्बाद कर दिया था। वर्ष 1974 में पुरातात्विक खुदाई में इस खंडहर का पता चला। इसके बाद पंजाब सरकार ने इसे संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया।
महाभारत में भी इस खंडहर का वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने निर्वासन काल का एक साल यहां बिताया था। बलुआ पत्थरों से बना यह एक खुला म्यूजियम है।
इसमें हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां, अप्सराओं, पशुओं, गंधर्वों, प्राचीन संगीतकारों एवं प्राचीन समय की कामुक छवियों की मूर्तियां एवं शिलालेख मौजूद हैं। अनदेखी के कारण यह म्यूजियम बदहाली का दंश झेल रहा था। पिछले कई महीनों से तो यह बिल्कुल बंद था।
अब प्रशासन ने इसे खोलने और इसकी सही तरीक से देख-रेख करने का निर्णय लिया है। फिलहाल, यहां एक साइट अटेंडेंट के साथ एक पार्ट टाइम एक माली और एक स्वीपर तैनात है।
चार माली और छह सिक्योरिटी गार्ड के लिए विभागीय मुख्यालय को बता दिया गया है। ऐसे में अगर इस वीकएंड पर आप इस खंडहरनुमा पर्यटन स्थल की सैर करना चाहते हैं तो बेझिझक जाइए और अपने देश की प्राचीनता व समृद्घि की गाथाओं को जानिए।