रेनू के पिता दलबीर सिंह और माता कमलेश माला पिरोकर घर का गुजारा कर रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी माता-पिता ने हार नहीं मानी और आज बेटी को अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बना दिया। अब बेटी का सपना कि वह एशिया कप में स्वर्ण पदक जीते। इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही है। रेनू का कहना है कि उज़्बेकिस्तान में होने वाले मैत्री मैच में भी भाग लेने के लिए वह 24 मार्च को जाएंगी।
कैंप के दौरान भी लगी थी चोट, लेकिन नहीं टूटा हौसला
रेनू का कहना है कि एक दिसंबर 2020 से गोवा में कैंप शुरू हुआ था। ढाई महीने तक कैंप चला। उसके बाद एक बार वह घर आ गईं। फिर 25 फरवरी 2021 से दोबारा कैंप शुरू हुआ। यहां आने के बाद एक सप्ताह के लिए क्वारंटीन किया गया। फिर आठ मार्च से अभ्यास करना शुरू किया तो उसी ही दिन चोट लग गई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। दो दिन रेस्ट करने के बाद फिर अभ्यास शुरू किया।
रेनू की उपलब्धियां
- वर्ष 2020 में खेलों इंडिया में स्वर्ण पदक
- 2019 में स्कूली नेशनल में स्वर्ण पदक
- 2018 में खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक
मुझे बेटी पर गर्व है। कोच और बेटी की मेहनत रंग लाई है। काफी खुशी है कि बेटी का चयन एशिया कप के लिए हुआ है। उम्मीद है कि बेटी स्वर्ण पदक जीतेगी। - दलबीर सिंह, रेनू के पिता, मंगाली।