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अमेरिका, रूस, श्रीलंका और उज्बेकिस्तान में बढ़ रहा है हिंदी का प्रभाव, पीयू के हिंदी विभाग ने वेब संवाद का किया आयोजन

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चंडीगढ़। पीयू के हिंदी विभाग ने वेब संवाद का आयोजन किया। इस संवाद में विदेशी विशेषज्ञों को जोड़ा गया, जिन्हें हिंदी से प्रेम बहुत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका, रूस आदि देशों में हिंदी का तेजी से प्रचार-प्रसार हो रहा है। यही नहीं, जगह-जगह केंद्रों पर हिंदी सिखाई जा रही है। विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने सभी का आभार जताया।
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इस परिचर्चा में विशेष रूप से अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय से हिंदी पाठ्यक्रम की प्रमुख शुचिस्मिता सेन, रूस के सेंट पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी में हिंदी शिक्षिका एकातेरीना कोस्तिना, श्रीलंका के राष्ट्रीय भाषा शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान से रिद्मा लंसकार और ताशकंद से निलूफर मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। इन सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उनके लिए भारत को जानने का जरिया हिंदी बनी है। कार्यक्रम में प्रो. सत्यपाल सहगल, डॉ. भवनीत भट्टी और प्रो. पंकज मालवीय और प्रो. विजय लक्ष्मी भी शामिल रहीं। इनके अलावा देशभर से लोग शामिल हुए।
रूस में हिंदी गानों के साथ ही बॉलीवुड अभिनेता के भी लोग कायल
एकातेरीना कोस्तिना ने कहा कि रूस में हिंदी भाषा के विकास में हिंदी सिनेमा और हिंदी गीतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने बताया कि दादी और नानी की ओर से बॉलीवुड गाने गुनगुनाने से मैंने देखा है कि मां व अन्य महिलाएं बॉलीवुड स्टार मिथुन चक्रवर्ती की प्रशंसक हैं। हिंदी के विद्वान राहुल सांकृत्यायन भी यहां काफी लोकप्रिय हैं।
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हिंदी भाषा की अपनी अलग मिठास
रिद्मा लंसकार ने बताया कि हिंदी भाषा की एक अपनी अलग ही मिठास है। साथ ही बताया कि भारत और श्रीलंका में सांस्कृतिक समानताएं ज्यादा हैं। 1880 में एक भारतीय ड्रामा मंडल यहां आता है, जिससे सिंहली रंगमंच प्रभावित होते हैं और वे हिंदी सीखते हैं, कलाओं के साथ-साथ हिंदी भाषा से प्रेम करने लगते हैं। लोगों को भी हिंदी सिखाना शुरू कर देते हैं।
अनुवाद के क्षेत्र में हिंदी का विकास हुआ
निलूफर ने बताया कि उज्बेकिस्तान में हिंदी को भी अब पढ़ाया जाता है। अनुवाद के क्षेत्र में भी खूब विकास हुआ है। हिंदुस्तानी जर्नलिज्म को भी पढ़ाया जाने लगा है। मैंने खुद प्रेमचंद की हिंदी भाषा से उज्बेकिस्तानी अनुवाद पर रिसर्च किया है। यहां पर हिंदी में पीएचडी होती है और रिसर्चर की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। यहां भाषा विज्ञान, हिंदी साहित्य के इतिहास अनुवाद पर रिसर्च होता है।
अमेरिका में प्रेमचंद सबसे अधिक लोकप्रिय लेखक
शुचिस्मिता सेन ने कहा कि अमेरिका में प्रेमचंद सबसे ज्यादा लोकप्रिय लेखक हैं। उनके साहित्य ने हिंदी को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई है। यहां हिंदी को लेकर काफी रुचि देखी जा रही है। एक सवाल के जवाब में इन्होंने बताया कि वह स्वयं प्रेमचंद को पढ़ना बहुत पसंद करती हैं। यहां बड़े-बड़े शहरों में हिंदी भाषा बाखूबी सिखाई जाती है।
हिंदी की व्यापक पहुंच से अवगत कराया
विभागाध्यक्ष डॉ. गुरमीत सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि इस वर्ष हिंदी महोत्सव में विशेष तौर पर ऑनलाइन माध्यम का लाभ उठाकर के देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों के विद्वानों को जोड़ने की कोशिश की गई है ताकि हमारे विद्यार्थी हिंदी की व्यापक पहुंच से अवगत हो सकें।
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