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#हिंदीहैंहमः शिक्षाविद् बोले- हिंदी ताकतवर भाषा, बोलने में शर्म न करें, अधिक से अधिक प्रयोग करें

Tue, 25 Aug 2020 11:19 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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शिक्षाविद्- प्रो. मीरा गौतम, राजवंत राय शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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सबसे समृद्ध भाषाओं में यदि कोई भाषा हिंदुस्तान में है तो वह है हिंदी। लेकिन कुछ लोग इसका प्रयोग करने में हिचकते हैं, क्योंकि हिंदी में बात करना उन्हें अच्छा नहीं लगता। उनकी स्टेट्स सिंबल भाषा अंग्रेजी बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब हम आत्मनिर्भर बन रहे हैं तो क्यों न अपनी भाषा को भी आत्मनिर्भर बनाएं। हिंदी ताकतवर भाषा है। तेजी से यह आगे बढ़ रही है। रोजगार भी दे रही है। जरूरत इस बात की है कि इसका अधिकाधिक प्रयोग हो। सरकारी कार्यालय हों या शिक्षण संस्थान, हिंदी में बातचीत करें। आइए जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ-
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बच्चों को सिखाएं हिंदी, समृद्ध होगी भाषा
हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक लोगों को करना चाहिए। केंद्र सरकार ने अब नई शिक्षा नीति में भी भाषा को आगे ले जाने की बात कही है। जब बच्चों को शुरू से ही हिंदी सिखाई जाएगी तो यह भाषा और समृद्ध होगी।
- प्रो. प्रशांत गौतम, यूआईएचटीएम विभाग पीयू

परहेज न करें.. पैरेंट्स बच्चों को हिंदी में बात करना सिखाएं
अभिभावक बच्चों को सबसे पहले अंग्रेजी सिखाते हैं। हर चीज को वह अंग्रेजी में ही बताते हैं जबकि उसका हिंदी अर्थ बच्चे नहीं जान पाते। इस प्रक्रिया को ठीक करना होगा। हर अभिभावक को बच्चों से हिंदी में बात करनी होगी और उसके प्रति प्रेम जगाना होगा।
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- डॉ. जेएस सहरावत, एंथ्रोपोलॉजी विभाग पीयू
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हिंदी को मूल स्वरूप में लाना होगा

हिंदी को बढ़ाने के लिए हमको इसके मूल स्वरूप में लाना होगा। डिजिटाइजेशन का जमाना है। मात्राओं से लेकर शब्द तक में भ्रांतियां उत्पन्न हो गईं। मोबाइल की तकनीक को छोड़कर कलम और किताब को उठाना होगा, तभी हिंदी को पुराने रूप में लौटाया जा सकता है।
- प्रोफेसर मीरा गौतम, जीरकपुर, पूर्व डीन कला और भाषा संकाय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय

अपनी भाषा की सेवा करनी जरूरी
आप देखिए कि पंजाबी की सेवा कितनी हो रही है। यही वजह है कि पंजाबी
दुनिया में फैल चुकी है। हिंदी की भी हमको सेवा करनी होगी। हिंदी का यह विकृत स्वरूप इस वजह से हो गया है कि इसके शब्द, मात्राओं तक में गलतियां होती हैं। इसे बढ़ावा देने का एक ही तरीका है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपनाएं।
- अशोक भंडारी नादिर, साहित्यकार, पंचकूला

हिंदी बोलना हम सबका दायित्व
हिंदी में बोलना या अपने विचार प्रकट करना हम सबका दायित्व है। बिना किसी अन्य भाषा पर दबाव बनाए ही हिंदी प्रगति के पथ पर अग्रसर है। अमर उजाला का ‘हिंदी हैं हम’ अभियान इस दिशा में निश्चित तौर पर एक सराहनीय प्रयास है। हिंदी वह भाषा है कि जिसमें हम अपने विचार उसी तरीके से दूसरे के सामने रख सकते हैं जिस तरीके से हम सोचते हैं।
- राजवंत राय शर्मा, सदस्य गो सेवा कमीशन पंजाब

आज हर जगह हिंदी की राज
हिंदी भाषा हमारी अपनी भाषा है, फिर भी लोग इसे बोलने में शर्माते हैं। लेकिन अब समय बदल गया है। आज के समय में बिना हिंदी भाषा के हम कोई काम नहीं कर सकते हैं। घर के बगीचे से लेकर बड़े पर्दे तक हिंदी का राज है। ऐसे में हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम अपने परिवार से हिंदी में बात करें। हिंदी में लिखे साहित्य को परिवार को बताएं। इससे ही सबका फायदा होगा।
- अशोक झा, पूर्व पार्षद मोहाली नगर निगम
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