हिमाचल विधानसभा चुनाव की राजनीति चंडीगढ़ में भी गरमा गई है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि शहर में हिमाचल से संबंध रखने वाले करीब एक लाख लोग रहते हैं। इनमें से 20 से 25 हजार ऐसे हैं जो हिमाचल के भी वोटर हैं। चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा से जुड़े लोग और संगठन सक्रिय हो गए हैं। अपने उम्मीदवार के समर्थन में हजारों की संख्या में लोग एक नवंबर के बाद से चंडीगढ़ से रवाना हो जाएंगे।
चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल खुद भी हिमाचल की मूल निवासी है ऐसे में भाजपा ने आशा जसवाल से विधानसभा की कई सीटों पर प्रचार करवाने की रणनीति बनाई है। जसवाल के करीबी रिश्तेदार देहरा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। सांसद किरण खेर भी हिमाचल विधानसभा की सीटों पर प्रचार करने के लिए जाएगी। कांग्रेस और भाजपा ने हिमाचल से जुड़े नेताओं को अलग अलग सीटों पर प्रचार करके उम्मीदवारों को जिताने की जिम्मेवारी सौंप दी है। हिमाचल महासभा के पदाधिकारी भी प्रचार के लिए जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के लिए चंडीगढ़ के युवाओं की मांग ज्यादा है। इसका एक कारण यह है कि वह प्रचार के साथ साथ सोशल मीडिया का काम भी संभाल लेते हैं।
इन सीटों पर चंडीगढ़ के वोटरों का प्रभाव
ऊना, कांगड़ा, बिलासपुर, मंडी और शिमला की विधानसभा सीटों पर चंडीगढ़ में रहने वाले हिमाचली लोग प्रभाव डालेंगे क्योंकि इन क्षेत्रों के लोग सबसे ज्यादा चंडीगढ़ में रहते हैं। चंडीगढ़ भाजपा ने ऊना विधानसभा सीटों पर मोर्चा संभाल लिया है। भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन को जिला ऊना की 5 विधानसभा का प्रभारी बनाया गया है जबकि टंडन नेे आगे हरोली सीट का रविकांत शर्मा, गगरेट सीट का रविंदर पठानिया, कुटलैहड़ सीट के लिए मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन रामवीर भट्टी, चितंपूर्णी में सत्यवान शेरा और ऊना सीट के लिए पूर्व मेयर अरुण सूद को प्रभारी बनाया है। युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष अमित राणा भी मूल रूप से हिमाचल के रहने वाले हैं। कांग्रेस के पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल भी प्रचार के लिए जाएंगे।