जंग-ए-आजादी स्मारक के चेयरमैन पत्रकार बरजिंदर सिंह हमदर्द को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए जंग-ए-आजादी मेमोरियल निर्माण मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। उनकी याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें जांच में शामिल होने का आदेश दिया है।
डॉ. हमदर्द जंग-ए-आजादी स्मारक के चेयरमैन थे। यह स्मारक 2012 में तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार ने जालंधर से 18 किलोमीटर दूर करतारपुर में 25 एकड़ में तैयार किया था। इसके निर्माण पर 315 करोड़ रुपये खर्च आया था और प्रोजेक्ट में याची की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
आम आदमी पार्टी की सरकार के गठन के बाद इस प्रोजेक्ट की विजिलेंस जांच शुरू हुई। हमदर्द ने चेयरमैन पद छोड़ दिया था अब उन्हें विजिलेंस ने कथित भ्रष्टाचार के मामले में पेश होने का आदेश दिया था। हमदर्द ने अपने खिलाफ दर्ज एफआइआर को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है।
हमदर्द ने याचिका में कहा कि इस मामले में उन्हें राजनीतिक रंजिश के तहत फंसाया जा रहा है। ऐसे में एफआईआर रद्द की जाए और जब तक यह याचिका हाईकोर्ट विचाराधीन है तब तक एफआईआर पर रोक लगाई जाए।
याचिका में जांच पंजाब पुलिस के बजाय सीबीआई या अन्य किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से करवाने की मांग की गई है। याची ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है। हाईकोर्टने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने हमदर्द को जांच में शामिल होने का आदेश देते हुए मामले की सुनवाई 18 जुलाई तक स्थगित कर दी।