हरियाणा पुलिस के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की विधवा को पारिवारिक पेंशन देने में 25 साल की देरी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया है।
मृत कर्मचारी की दो पत्नियां थीं और विवाद के चलते सरकार ने किसी को भी पेंशन जारी नहीं की थी, विवाद 25 साल से चल रहा था।
गुरुग्राम निवासी मुन्नी बाई व अन्य ने साल 2000 में याचिका दायर कर पेंशन की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि उसके पति राम सहिन हरियाणा पुलिस से 1 अगस्त 1985 को सेवानिवृत्त हुए थे और 23 फरवरी 2000 को उनका निधन हो गया। चूंकि मृतक कर्मचारी की दो पत्नियां थीं, सरकार ने विवाद के चलते किसी को भी पेंशन जारी नहीं की।
याचिकाकर्ता ने बताया कि पहली पत्नी का निधन 24 जुलाई 2006 को हो गया और अब परिवार में कोई पुरुष सदस्य नहीं है। ऐसे में उसे पेंशन मिलनी चाहिए। सरकार की तरफ से कहा गया कि विभाग यह तय नहीं कर पाया कि याचिकाकर्ता मृतक की कानूनी रूप से वैध पत्नी हैं या नहीं, क्योंकि पेंशन दस्तावेजों में पहली पत्नी को कानूनी उत्तराधिकारी बताया गया था। अदालत ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी थी कि वह कानून के अनुसार पेंशन जारी करे, न कि पूरी राशि को रोक कर रखे।
कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि याचिकाकर्ता मृतक कर्मचारी की कानूनी रूप से वैध पत्नी साबित होती हैं, तो पेंशन और बकाया राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दी जाए। साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि यदि मृतक के परिवार का अन्य कोई भी व्यक्ति इस पेंशन पर दावा करता है, तो सरकार उसके दावे पर भी विचार कर सकती है। कोर्ट ने सरकार को दो महीने के भीतर सभी आवश्यक कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया और इस देरी को अन्यायपूर्ण करार दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि 25 वर्षों से याचिकाकर्ता को उसका हक नहीं मिला और सरकार की निष्क्रियता के कारण पेंशन जारी नहीं हुई।