पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से खालसा कॉलेज अमृतसर की गौरवशाली विरासत को सुरक्षित रखने के लिए खालसा विवि एक्ट-2016 को रद्द करने संबंधी अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
खालसा विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि यह अध्यादेश पंजाब के राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर द्वारा भारतीय संविधान की धारा-213 की उपधारा (एक) के अधीन जारी किया गया है। इसके साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से 125 वर्ष पुराने खालसा कॉलेज की शानदार विरासत को सुरक्षित करने का वायदा पूरा करने का दावा किया गया है।
याचिका में कहा गया कि पंजाब सरकार के अनुसार, यह कॉलेज समय बीतने के साथ खालसा विरासत का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है और 2016 में स्थापित इस यूनीवर्सिटी द्वारा कॉलेज की शान और रुतबे को क्षति पहुंचने की संभावना थी, इस कारण इस एक्ट को वापस लेने का प्रस्ताव है।
याची ने कहा कि हालांकि प्रभावित विद्यार्थियों को उनकी योग्यतानुसार प्रदेश के अन्य संस्थानों में प्रवेश देने का प्रावधान दिया गया है, परंतु यह व्यवस्था काफी नहीं है। राज्य मंत्रिमंडल की अप्रैल में हुई बैठक के दौरान यह फैसला लिया। याची ने कहा कि मानसून सत्र आने वाला था और सरकार उस समय भी यह निर्णय ले सकती थी, लेकिन अचानक सत्र से ठीक पहले अध्यादेश लाने की जल्दबाजी सरकार के निर्णय को सवालों के घेरे लाकर खड़ा कर देती है।
याची ने कहा कि इस आर्डिनेंस का नाम खालसा यूनिवर्सिटी (रीपील) आर्डिनेंस 2017 है, जोकि सरकारी गजट में प्रकाशित होने की तिथि के बाद लागू हो जाएगा। ऐसे में इस पर रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने याचिका पर प्राथमिक सुनवाई करते हुए किसी भी प्रकार का नोटिस जारी किए बगैर सुनवाई 11 जुलाई तक टाल दी।