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हाईकोर्ट ने पूछा- महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना जरूरी क्यों नहीं?

Fri, 12 Jan 2018 09:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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महिलाओं को हेलमेट से छूट पर हाईकोर्ट का संज्ञान - फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से पूछा है कि आखिर उनके यहां दिल्ली की तर्ज पर पगड़ी न पहनने वाली महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना जरूरी क्यों नहीं है?
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महिलाओं के लिए हेलमेट अनिवार्य करने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तीनों राज्यों से यह बात पूछी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में चंडीगढ़ की तरफ सेे बताया गया था कि शहर में पिछले तीन साल में रोड एक्सीडेंट में 24 महिलाएं जान गंवा चुकी हैं तथा 84 महिलाएं घायल हुई हैं।

जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस अनुपिन्दर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने इस जानकारी पर पर कहा कि उन्हें आंकड़े नहीं चाहिए, यह बेहद ही महत्वपूर्ण मामला है और खंडपीठ जानना चाहती है कि दुपहिया वाहन चलाने वाली महिलाओं की रोड पर सुरक्षा सुनिश्चित करने केलिए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ क्या कर रहे हैं। क्या इस मामले में कोई कानून बनाया जा सकता है या नहीं। 
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हाईकोर्ट ने पत्र पर लिया संज्ञान 

Girls without helmet - फोटो : File Photo
हाईकोर्ट को बताया गया कि दिल्ली में ऐसा कानून बना लिया गया गया है जिसके चलते पगड़ी न पहनने वाली महिलाओं के लिए टू व्हीलर्स पर हेलमेट पहनना अनिवार्य किया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर हरियाण, पंजाब और चंडीगढ़ से पूछा कि ऐसा यहां पर क्यों नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने पत्र पर लिया संज्ञान 
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट एक पत्र मिला था जिसमें टू व्हीलर्स पर महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य करने की मांग की गई थी। पत्र में अरोमा होटल के सामने स्कूटी के हरियाणा रोडवेज की बस की चपेट में आकर युवती की मौत का जिक्र किया गया था।

पत्र में लिखा गया है था कि केंद्र सहित पंजाब और हरियाणा ने उन सिखों को हेलमेट पहनाने से छूट दी है, जो पगड़ी पहनते हैं। हाईकोर्ट को बताया गया कि कोई भी धर्म सुरक्षा के प्रावधानों से सुरक्षा मानकों से ऊपर नहीं है। लिहाजा सभी महिलाओं और खासतौर पर वह सिख महिलाएं जो पगड़ी नहीं पहनती हैं उनके लिए टू व्हीलर्स पर हेलमेट अनिवार्य किया जाना चाहिए। पत्र पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया था। 
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