सुखना लेक को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश
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सिटी ब्यूटीफुल की पहचान सुखना लेक का वजूद बचाने के लिए चंडीगढ़, मोहाली व पंचकूला के सैकड़ों जागरूक लोगों ने अपने सुझाव दिए हैं। यह जानकारी शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दी गई।
इस पर जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस रामेंद्र जैन की खंडपीठ ने यूटी प्रशासन को आदेश जारी किए कि सभी सुझावों पर विचार करने के बाद मामले की अगली सुनवाई पर प्रशासन सुखना लेक बचाने की कोई ठोस योजना लेकर हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचें और विस्तृत जानकारी दें कि सुखना लेक को कैसे बचाया जा सकता है?
हाईकोर्ट ने सुखना लेक की स्थिति पर चिंता जताते हुए इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर यूटी प्रशासन, पंजाब और हरियाणा को इस मामले पर प्रतिवादी बनाया हुआ है। इस मामले में हाईकोर्ट को सहयोग दे रहे एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन और एडवोकेट तनु बेदी ने हाईकोर्ट को बताया की उनके पास सैकड़ों सुझाव पहुंचे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि अधिकतर लोगों ने सुखना को डी-सिल्ट करने की बात कही है।
इस पर खंडपीठ ने भी सहमति जताते हुए कहा की सुखना से गाद निकलना सबसे जरूरी है। क्योंकि गाद और जलीय वनस्पति ही सुखना लेक के लिए सबसे घातक है। सुखना को डी-सिल्ट किए बिना सुखना को नहीं बचाया जा सकता है। शक्रवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पांच वर्षों से सुखना को बचाने के लिए कागजी कार्रवाई ही हुई है। किसी ने भी सुखना लेक को बचाने का
कोई ठोस प्रयास नहीं किया है। यही वजह है कि सुखना पर संकट बढ़ता जा रहा है और सुखना पहले जैसी खूबसूरत नहीं रही है। कोशिश होनी चाहिए कि सुखना के वजूद को बचाने के साथ-साथ इसे पहले से अधिक खूबसूरत बनाने का प्रयास हो।