फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PGI को हाईकोर्ट का नोटिस, जानिए क्यों

Sat, 02 Aug 2014 08:39 AM IST
सुरजीत सिंह सत्ती/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
पीजीआई में दवा की दुकानों का किराया अधिक होने के कारण मरीजों से दवाओं के अधिक दाम वसूलने की आशंका जताते हुए दुकानों के नए टेंडर रद्द करने की मांग की गई है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका दायर में कहा गया है कि दुकानों के किराया ऐसा होना चाहिए कि दवा बिक्री का अधिकतम लाभ मरीजों को मिले। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने पीजीआई निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 25 अगस्त को होगी।

मरीजों का शोषण कर रहे हैं दुकानदार

एडवोकेट मनीषा गर्ग ने याचिका दायर कर मांग की है कि पीजीआई स्थित केमिस्ट दुकानों पर दवाओं की बिक्री का अधिकतम लाभ यहां आने वाले गरीब मरीजों को दिलाना सुनिश्चित बनाया जाए।

इसके अलावा दूसरा विकल्प विशेषज्ञों की कमेटी गठित कर केमिस्टों द्वारा मरीजों के हो रहे कथित शोषण की जांच करवाकर दुकानों को किराए पर देने का टेंडर रद्द किया जाना चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पीजीआई ने दुकानों का किराया इतना अधिक रखा है कि पीजीआई में इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर ही इसका आर्थिक दबाव बनेगा, क्योंकि किराया निकालने के लिए केमिस्ट अधिक दाम पर दवाएं बेचेंगे।

पीजीआई गरीब मरीजों के लिए बनाया गया है

याचिका में कहा है कि उत्तर भारत में पीजीआई चंडीगढ़ गरीबों को कम कीमत पर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कराने के उद्देश्य से बनाया गया था। यहां विभिन्न स्वास्थ्य क्षेत्रों की विशेषताएं हैं और अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है।

यही नहीं हर एक साल केंद्रीय बजट में सैकड़ों करोड़ रुपये पीजीआई को जारी होते हैं। इसके विपरीत अब यह संस्थान एक व्यापारिक संस्थान बन चुका है, जिसकी ताजा मिसाल पीजीआई स्थित केमिस्ट दुकानों के किराए के टेंडर से में मिलती है। हवाला दिया गया है कि पीजीआई रोहतक में दुकानें अधिक डिस्काउंट देने वालों को अलॉट की जाती हैं।

पीजीआई में नया किराया

एडवांस पिडिएट्रिक------------1135959
ओपीडी (दो दुकानें)-----------4807434
नेहरू ब्लॉक------------------4977307
नेहरू ब्लॉक------------------3853707
ओल्ड शॉपिंग कांप्लेक्स---------1731573
विज्ञापन

एक ही दवा की अलग-अलग कीमत

याचिका में यह भी कहा गया है कि पीजीआई में ही अलग-अलग दुकानों पर एक ही दवा की कीमतों में भिन्नता है। इसके अलावा, जिन दुकानों का किराया अधिक था, वहां डिस्काउंट कम है और जहां किराया कम है, वहां डिस्काउंट अधिक है।

अब तक पीजीआई में त्रिलोक केमिस्ट का मासिक किराया 56 लाख, सुपर केमिस्ट का 22 लाख 16 हजार, दुर्गा मेडिकोज का 10 लाख 53 हजार और नीलकंठ ड्रग स्टोर का पांच लाख रुपये किराया था।

इन दुकानों पर एक ही दवा की कीमतों में भिन्नता मिली। याचिका में आशंका यह भी जताई गई है कि महंगा किराया देकर या तो दवाएं महंगी कीमत पर बिकेंगी या फिर घटिया किस्म की दवाएं बेची जाएंगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें