दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज के समाधि पर जाने के मामले में हाईकोर्ट ने दाखिल एक जनहित याचिका में अपना कानूनी रवैया स्पष्ट कर दिया है।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरूण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने कहा कि ये मामला किसी भी सूरत में जनहित का नहीं है। कुछ लोगों का अपना धार्मिक विश्वास है और हाईकोर्ट सामाजिक नियमों के खिलाफ नहीं जा सकता है।
हाईकोर्ट ने मामले पर कड़ी मौखिक टिप्पणी करते हुए गुरमेल सिंह द्वारा दाखिल जनहित याचिका को रद्द कर दिया है। जनहित याचिका में हाईकोर्ट से आग्रह किया गया था कि इस मामले में एक जांच बैठाई जाई जाए ताकि समाधि को लेकर चल रहे पूरे गेम प्लान को समझा जा सके कि ये विज्ञान का मुद्दा है या धर्म का मुद्दा है और इस मामले को एक लॉजिकल अंत दिया जा सके।