हरियाणा के सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों में तिरंगा फहराने का पहला हक आसपास के गांवों की सबसे पड़ी-लिखी बेटी का होगा। बेटियों के उच्च शिक्षा प्राप्त न होने पर यह हक उच्च शिक्षा प्राप्त महिला को दिया जाएगा। पात्र बेटियां या महिलाएं एक से अधिक होने पर आयु अनुसार वरीयता मिलेगी। यानी जिनकी आयु सबसे कम होगी, वे ध्वजारोहण करेंगी। स्कूल हेड ने एसएमसी के साथ बैठक कर पात्र बेटियों और महिलाओं का चयन कर लिया है।
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत बेटियों का सलाम-राष्ट्र के नाम कार्यक्रम के तहत ऐसा करने का निर्णय लिया गया है। इन निर्देशों पर अमल करने के लिए सभी स्कूलों के मुखिया, डीईओ-डीईईओ, बीईओ व बीईईओ को सेकेंडरी शिक्षा निदेशक राजीव रतन की ओर से एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है। इसके जरिए समाज व महिला समुदाय को संदेश देगी कि महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा ही गरिमापूर्ण जीवन जीने का सबसे सशक्त साधन है।
शिक्षा ही महिलाओं को गांव के गणमान्य व्यक्तियों में स्थान देती है। अन्यथा तो पढ़ने-लिखने का अर्थ सरकारी नौकरी प्राप्त करना समझा जाता है। स्कूलों में तिरंगा फहराए जाने के बाद शैक्षणिक सत्र 2017-18 में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली छात्रों को सम्मानित किया जाएगा। प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम के तहत दसवीं, बारहवीं, बीए, एमए, एमफिल, पीएचडी में सबसे अधिक अंक पाने वाली छात्राएं सम्मानित की जाएंगी।
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्कूल के आसपास के गांवों की सभी बेटियों को बुलाया गया है। उनका ध्वजारोहण करने के लिए चिह्नित उच्च शिक्षा प्राप्त मुख्य अतिथि का दर्जा प्राप्त बेटी के साथ सामूहिक फोटो भी लिया जाएगा। जिसे स्कूल मुखिया अपने कक्ष में लगाने के साथ सोशल मीडिया पर भी अपलोड करेंगे। कार्यक्रम में अगस्त 2017 से अगस्त 2018 के बीच जन्मी बच्चियों को लाने के लिए अभिभावकों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। इनके नाम पर पौधरोपण होगा और पौधों के नाम बेटियों के नाम पर रखे जाएंगे।
कार्यक्रम के बाद एसएमसी बैठक में इन बिंदुओं पर होगी चर्चा
. निशुल्क वर्दी, पाठ्यपुस्तकों का समय पर वितरण
. गुणवत्तापरक शिक्षा और मासिक परीक्षा
. ड्रापआउट छात्रों का दोबारा दाखिला और सौ फीसदी पंजीकरण लक्ष्य
. बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को बतौर मिशन लेना
. स्वच्छ विद्यालय कार्यक्रम को सिरे चढ़ाना
. पौधागिरी को सफल बनाना