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Highcourt: मजहबी शब्द का अपमानजनक प्रयोग जातिगत गरिमा पर सीधा हमला, यह अपराध की श्रेणी में

Mon, 29 Sep 2025 08:23 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मोहाली स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में एक वरिष्ठ अधिकारी ने शिकायतकर्ता को उसकी जाति के नाम से अपमानित किया। यह घटना तीन अन्य स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति में उनके दफ्तर में हुई। बताया गया कि शिकायतकर्ता और अन्य कर्मचारी अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित थे।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मजहबी शब्द का अपमानजनक अथवा अपमान सूचक अर्थों में प्रयोग करना किसी व्यक्ति की जातिगत गरिमा पर सीधा प्रहार है। अदालत ने कहा कि ऐसा आचरण अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के दायरे में आता है।
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जस्टिस मनीषा बत्रा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब मजहबी शब्द का प्रयोग गाली या अपमानजनक रूप से किया जाता है तो यह निस्संदेह व्यक्ति की गरिमा पर उसके जाति नाम से हमला है। मामले के अनुसार मोहाली स्थित फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में एक वरिष्ठ अधिकारी ने शिकायतकर्ता को उसकी जाति के नाम से अपमानित किया। यह घटना तीन अन्य स्टाफ सदस्यों की उपस्थिति में उनके दफ्तर में हुई। बताया गया कि शिकायतकर्ता और अन्य कर्मचारी अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित थे। अदालत ने कहा कि यह सिद्ध विधिक सिद्धांत है कि यदि किसी व्यक्ति को उसकी जाति का नाम लेकर अपमानित या अपमानित करने की नीयत से सार्वजनिक रूप से संबोधित किया जाता है तो यह अधिनियम, 1989 की धाराओं के अंतर्गत अपराध बनता है।

जस्टिस बत्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि पंजाब में मजहबी सिखों को ऐतिहासिक रूप से दलित समुदाय माना गया है और वे अनुसूचित जाति के रूप में सूचीबद्ध हैं। हाई कोर्ट ने आरोपी अधिकारी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में अधिनियम के तहत अपराध का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत ने मोहाली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के उस आदेश को भी सही ठहराया जिसमें अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया था।
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