पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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औसत एक पेड़ से करीब 8 हजार पन्ने तैयार होते हैं और एक पेड़ दो लोगों को जीवन भर की ऑक्सीजन देने के लिए काफी होता है। ऐसे में 4 सदस्यों वाले करीब 2 हजार परिवारों के लिए हाईकोर्ट जीवन भर की आक्सीजन का इंतजाम करेगा। इसके साथ ही इन पन्नों को बनाने के लिए करीब 20 लाख लीटर पानी बर्बाद होता है। ऐसे में एक ओर 4 हजार पेड़ बचाने के साथ ही हाईकोर्ट हर साल 20 लाख लीटर पीने का पानी भी बचाएगा।
दोनों ओर प्रिंटिंग की अनुमति देने वाला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहला हाईकोर्ट होगा। हालांकि कई हाईकोर्ट में इसको लेकर याचिकाएं विचाराधीन हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में भी दोनों ओर की प्रिंटिंग की अनुमति के लिए अगस्त में याचिका दाखिल की गई थी।
जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि अब हाईकोर्ट को पूरी तरह से कैशलेस करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अब पेमेंट हेतू क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, कैश कार्ड, नेट बैंकिंग आदि से ही पेमेंट स्वीकार की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह कैशलैस हाईकोर्ट बनाने की दिशा में उठाया गया अहम कदम है।
जजमेंट के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे हाईकोर्ट के चक्कर
जस्टिस बिंदल ने बताया कि हाईकोर्ट ने ऐसी व्यवस्था की है जिसके चलते लोगों को हाईकोर्ट से आदेश की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करने केलिए चंडीगढ़ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निचली अदालतों को सिस्टम से जोड़ा जाएगा। जो भी चाहे वह निचली कोर्ट में अर्जी दाखिल कर निर्धारित फीस का भुगतान करके आदेश की प्रति प्राप्त कर सकेगा। रेप, महिला के खिलाफ अपराध व अवमानना मामलों में प्रति नहीं दी जाएगी।
मौत की सजा को लेकर 20 मामले लंबित
मौत की सजा के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अभी 20 मामले लंबित हैं। ऐसे में चीफ जस्टिस ने इसकी गंभीरता को देखते हुए तीन स्पेशल बेंच गठित की हैं। जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस जीएस गिल, जस्टिस एबी चौधरी व जस्टिस सुरेंद्र गुप्ता तथा जस्टिस राजन गुप्ता व जस्टिस राज शेखर अत्री। तीनों इन मामलों में सुनवाई कर जल्द फैसला लेंगे।