हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के निवासियों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण देने के मामले से केंद्र सरकार के पल्ला झाड़ने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि नौ मार्च को अगली सुनवाई पर केंद्र को हर बिंदु पर जवाब सौंपना होगा। फरीदाबाद इंडस्ट्रियल एसोसिएशन व अन्य ने याचिका दाखिल कर निजी क्षेत्र की नौकरियों में प्रदेश के लोगों को 75 फीसदी आरक्षण देने के फैसले का विरोध किया है।
एसोसिएशन ने हाईकोर्ट को बताया कि निजी क्षेत्र में योग्यता और कौशल के अनुसार लोगों का चयन किया जाता है। यदि नियोक्ताओं से कर्मचारी को चुनने का अधिकार ले लिया जाएगा तो उद्योग कैसे आगे बढ़ेंगे। हरियाणा सरकार का 75 प्रतिशत आरक्षण का फैसला योग्य लोगों के साथ अन्याय है। यह कानून उन युवाओं के सांविधानिक अधिकारों का हनन है जो अपनी शिक्षा और योग्यता के आधार पर भारत के किसी भी हिस्से में नौकरी करने को स्वतंत्र हैं।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने जवाब दाखिल करते हुए कहा कि संविधान के जिस प्रावधान का हवाला देकर एसोसिएशन हाईकोर्ट पहुंची हैं, वह नागरिकों के लिए है, कंपनी पर लागू ही नहीं होता। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। इस दौरान इस पर जब केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया तो केंद्र सरकार ने इसे राज्य का एक्ट करार देते हुए कहा कि इस मामले में उसका जवाब जरूरी नहीं है। इस जवाब पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार कैसे अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट सकती है। हाईकोर्ट ने सुनवाई को नौ मार्च तक टालते हुए केंद्र सरकार को याचिका पर बिंदुवार जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।