पंजाब में फूड सेफ्टी एक्ट के तहत खाद्य पदार्थों की जांच के लिए डेजिग्नेटेड अफसर नियुक्त नहीं करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हेल्थ सेक्रेटरी को निजी तौर पर पेश करने का संकेत दिया है। बेंच ने कहा है कि अगली सुनवाई 15 फरवरी से पहले नियुक्ति के नियम नहीं बनाए तो हेल्थ सेक्रेटरी स्वयं पेश होकर जवाब दें।
कुलदीप सिंह खैहरा ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से जनहित याचिका दायर करके आरोप लगाया था कि पक्के डेजिग्नेटेड अफसर लगाने की बजाय राज्य के जिलों में यह काम जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सौंपा गया है।
फूट सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट-2011 के तहत डेजिग्नेटेड अधिकारी लगाना जरूरी है, लेकिन सरकार केवल यह कह कर पल्ला झाड़ती रही कि नियुक्ति के लिए न केवल पंजाब लोकसेवा आयोग द्वारा नियम ड्राफ्ट किए जाने हैं, बल्कि इस नियम को मंत्रिमंडल की मंजूरी भी चाहिए। हाईकोर्ट ने नियम जल्द बनाने को कहा था। इस पर सरकार ने आश्वासन दिया था कि आठ फरवरी से पहले नियम बना लिए जाएंगे।
सोमवार को सरकारी वकील ने हाईकोर्ट में कहा कि अभी नियम नहीं बन पाए हैं, लिहाजा और समय प्रदान किया जाए। जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने सरकार की इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सख्ती बरती है।
बेंच ने कहा है कि यदि 15 फरवरी तक नियुक्ति नियम नहीं बनें तो हेल्थ सेक्रेटरी स्वयं पेश होकर जवाब दें। सरकार को 15 फरवरी तक नियम बनाकर जवाब देने का निर्देश दिया गया है।