चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अंतर्राष्ट्रीय फ्लाइट्स शुरू नहीं होने पर हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस गुरमीत राम की डिवीजन बेंच ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा है कि जब अंतराष्ट्रीय उड़ान शुरू नहीं करनी थी तो 1400 करोड़ रुपए खर्च करके यह एयरपोर्ट क्यों बनाया। बेंच ने कहा कि इसमें घपले की बू आ रही है, अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं होने के पीछे जिम्मेवार अधिकारियों को जेल में डाल देना चाहिए।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर 10 दिन में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने का शेड्यूल मांगा था, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरटी ऑफ इंडिया ने वीरवार को कहा कि 48 अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों से संपर्क किया गया, लेकिन कई देशों से तालमेल नहीं हो पा रहा है। बताया कि बुल्गारिया और दुबई से बातचीत हुई है। बेंच ने इस पर और टिप्पणी की कि अधिकांश लोग कारोबार या पढ़ाई के लिए कनाडा, अमेरिका, इंग्लैंड व आस्ट्रेलिया जाते हैं तो ऐसे में बुल्गारिया से बातचीत का क्या अधिक औचित्य है।
बेंच ने कहा कि अभी यहां से वही उड़ानें चल रही हैं, जो पहले चंडीगढ़ एयरपोर्ट से चलती थीं। यह सख्ती एयरपोर्ट अथॉरटी ऑफ इंडिया (एएआई) और केंद्र सरकार द्वारा अंतराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने के लिए ठोस कार्रवाई को और समय देने की मांग पर बरती है। वीरवार को फ्लाइट्स का शेड्यूल नहीं देने पर बेंच ने आखिरी मौका देते हुए नागरिक उडय्यन मंत्रालय, नागरिक उडय्यन के डायरेक्टर जनरल और एएआई को मीटिंग करके अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर फैसला लेने को कहा है और अगली सुनवाई सात अप्रेल को मीटिंग के मिनट्स पेश करने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई पर एएआई ने कहा था कि इंडिगो की फ्लाइट 27 मार्च से शुरू हो जाएगी, लेकिन विमानों की कमी के कारण कंपनी की ओर से अभी अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने में वक्त लग सकता है। इस पर टिप्पणी करते हुए बेंच ने कहा था कि 1400 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद भी अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू नहीं होना अपने आप में बड़ा घोटाला है, लिहाजा इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। उधर पंजाब के एडवोकेट जनरल अशोक अग्रवाल, हरियाणा और यूटी की ओर से पेश हुए सरकारी वकीलों ने भी सीबीआई से जांच कराने का समर्थन किया था और वीरवार को फिर से वही बात दोहराई कि मामला सीबीआई के हवाले कर दिया जाना चाहिए।