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हरियाणा में नहीं टिक पाया आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण, 5 साल से चला आ रहा स्टे

Tue, 08 Jan 2019 11:44 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Reservation in India
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मोदी सरकार ने अब कदम उठाया, जबकि हरियाणा में जनवरी 2013 में ही आर्थिक रूप से पिछड़ों को दस फीसदी आरक्षण दे दिया गया था, लेकिन यह फैसला टिक नहीं पाया। 5 साल से आरक्षण पर स्टे लगा हुआ है।
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हुड्डा कैबिनेट ने 23 जनवरी 2013 को वित्त मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा की अध्यक्षता में 12 दिसंबर 2012 को गठित उपसमिति की रिपोर्ट पर मुहर लगाई थी। बावजूद इसके हुड्डा का आर्थिक पिछड़ों को दिया गया दस फीसदी आरक्षण पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नहीं टिक पाया। पांच साल चली सुनवाई के बाद 13 जनवरी 2018 को हाईकोर्ट ने आर्थिक आरक्षण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। तब से रोक ही चली आ रही है।

हुड्डा सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए परिवार की कृषि आय सहित सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये निर्धारित की थी। चूंकि, वर्ष 2011-12 में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय 1,10,000 रुपये थी। इसे दोगुना करने पर यह 2.20 लाख रुपये बन जाती है। मुद्रा स्फीति तथा अन्य दबावों को जोड़कर इस राशि को 2.50 लाख रुपये किया गया था। परिवार का कोई सदस्य आयकर दाता है, तो आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना था। आरक्षण का कोटा वर्टिकल यानी अलग से कोटा 10 प्रतिशत तय किया गया था। होरिजोंटल यानी किसी जाति के कोटे से यह आरक्षण नहीं था।
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आरक्षण का कुल कोटा 69.5 फीसदी हो गया था

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को आरक्षण मिलने के बाद हरियाणा में कोई जाति-वर्ग आरक्षण से बाहर नहीं रहा और राज्य में आरक्षण का कुल कोटा 69.5 फीसदी हो गया था। लेकिन, हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं के आगे आरक्षण टिक नहीं पाया। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को आर्थिक पिछड़ों को दिए गए दस फीसदी आरक्षण की राह भी आसान नहीं होगी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को आर्थिक आधार के आरक्षण पर रोक लगाने के लिए नजीर माना था।

याचिकाकर्ता ने सौंपी थी गुजरात हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी
13 जनवरी 2018 को हाईकोर्ट ने सुनील व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आर्थिक आरक्षण पर रोक लगाई थी। याचिकाकर्ता ने गुजरात हाईकोर्ट के गुजरात में आर्थिक आधार पर आरक्षण को रद्द करने के फैसले की प्रति हाईकोर्ट में सौंपी थी। इसके बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए नौकरियों में आर्थिक आधार पर 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने वाली नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। इससे सामान्य श्रेणियों के आर्थिक रूप से पिछड़ों को हरियाणा में सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलना बंद हो गया है।
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