मोदी सरकार ने अब कदम उठाया, जबकि हरियाणा में जनवरी 2013 में ही आर्थिक रूप से पिछड़ों को दस फीसदी आरक्षण दे दिया गया था, लेकिन यह फैसला टिक नहीं पाया। 5 साल से आरक्षण पर स्टे लगा हुआ है।
हुड्डा कैबिनेट ने 23 जनवरी 2013 को वित्त मंत्री हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा की अध्यक्षता में 12 दिसंबर 2012 को गठित उपसमिति की रिपोर्ट पर मुहर लगाई थी। बावजूद इसके हुड्डा का आर्थिक पिछड़ों को दिया गया दस फीसदी आरक्षण पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नहीं टिक पाया। पांच साल चली सुनवाई के बाद 13 जनवरी 2018 को हाईकोर्ट ने आर्थिक आरक्षण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। तब से रोक ही चली आ रही है।
हुड्डा सरकार ने आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए परिवार की कृषि आय सहित सभी स्रोतों से कुल वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये निर्धारित की थी। चूंकि, वर्ष 2011-12 में हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय 1,10,000 रुपये थी। इसे दोगुना करने पर यह 2.20 लाख रुपये बन जाती है। मुद्रा स्फीति तथा अन्य दबावों को जोड़कर इस राशि को 2.50 लाख रुपये किया गया था। परिवार का कोई सदस्य आयकर दाता है, तो आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाना था। आरक्षण का कोटा वर्टिकल यानी अलग से कोटा 10 प्रतिशत तय किया गया था। होरिजोंटल यानी किसी जाति के कोटे से यह आरक्षण नहीं था।