पंजाब के शास्त्रागारों से हथियार गायब होने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि चार माह में यदि गायब हथियारों का ब्योरा नहीं दिया गया तो संबंधित जिलों के एसएसपी को हाईकोर्ट में हाजिर होकर जवाब देना होगा। हाईकोर्ट के आदेश पर डीजीपी ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया था।
याचिका दाखिल करते हुए दलजीत सिंह ने हाईकोर्ट को बताया था कि सूबेदार मेजर मलावा सिंह को लाइसेंस जारी किया गया था और उन्होंने इसे तरनतारन पुलिस स्टेशन में जमा करवा दिया था। आरोप के अनुसार बख्शीश सिंह ने चोरी से इस हथियार को वहां से गायब कर दिया।
कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में तब आया जब इस हथियार को अपने रिश्तेदार का बताते हुए इसका कब्जा दिलाने के लिए दिलजीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
हाईकोर्ट में तरनतारन के एसएसपी ने हलफनामा दाखिल किया तो उसमें भी रिकवरी को लेकर गोल मोल जवाब दिया गया। हाईकोर्ट ने कहा था कि शस्त्रागार से एक शस्त्र गायब है जिसे ढूंढ़ने में अभी तक पुलिस नाकाम है जो दयनीय स्थिति को दर्शाता है। कोर्ट ने इस पर पंजाब के डीजीपी को पूरे पंजाब के शस्त्रागार में मौजूद हथियारों का ब्योरा सौंपने का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन करनवीर सिंह एसपी ने हलफनामा दायर कर बताया कि गायब हथियारों में से एक बरामद कर लिया गया है। एसआईटी गायब हथियारों के संबंध में विवरण प्रस्तुत करने के लिए संबंधित जिलों के संबंधित एसएसपी से जानकारी मांग रही है लेकिन पुलिस की ओर से इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने राज्य शस्त्रागार से गायब हथियारों का विवरण प्रस्तुत करने के लिए चार महीने का समय देते हुए साफ कर दिया कि यदि सरकार विवरण देने में विफल रही, तो संबंधित जिलों के एसएसपी को अदालत में पेश होना होगा।