चंडीगढ़ में स्टेट काउंसिल की संख्या केवल 20 है जिसमें से एक काउंसिल डीसी आफिस में तैनात है। लंच के बाद अन्य काउंसिल को स्थायी लोक अदालत व लोक अदालत में जाना पड़ता है। इसका खामियाजा वकीलों व लोगो को भुगतना पड़ता है।
चंडीगढ़ की जिला अदालत में सरकारी वकीलों की कमी के चलते न्याय प्रक्रिया की सुस्त रफ्तार को आधार बनाते हुए दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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चंडीगढ़ जिला अदालत बार एसोसिएशन की याचिका पर हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई तक जवाब दाखिल नहीं किया गया तो जुर्माना लगाया जाएगा।
चंडीगढ़ जिला बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि जिला अदालत में सरकारी वकीलों की संख्या बहुत कम है जिससे न्याय की प्रक्रिया सुस्त पड़ गई है। चंडीगढ़ जिला अदालत में जजों की संख्या 29 है, जबकि स्टेट काउंसिल की संख्या केवल 20 है। इन काउंसिल को ही स्थायी लोक अदालत व लोक अदालत में पेश होने के लिए जाना पड़ता है।
कोर्ट को बताया गया कि चंडीगढ़ में स्टेट काउंसिल की संख्या केवल 20 है जिसमें से एक काउंसिल डीसी आफिस में तैनात है। लंच के बाद अन्य काउंसिल को स्थायी लोक अदालत व लोक अदालत में जाना पड़ता है। इसका खामियाजा वकीलों व लोगो को भुगतना पड़ता है। चंडीगढ़ में जिला अदालत में जजों की संख्या तो बढ़ गई, लेकिन वकीलों की संख्या सालों पुरानी है। सभी कोर्ट में वकील पेश न होने के कारण मामलों में गवाही व पेशी पर प्रभाव पड़ता है। मामलों में समय पर सुनवाई नहीं हो पाती व लंबी-लंबी तारीख पड़ रही है।
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जजों की संख्या ज्यादा व सरकारी वकीलों की संख्या कम होने के कारण वकील सभी कोर्ट को समय नहीं दे पाते। इसका नुकसान न्याय प्रणाली को हो रहा है। याचिका में हाईकोर्ट से अपील की गई है कि वो सरकार को आदेश दे कि हर कोर्ट में सरकारी वकील उपलब्ध हो इसके लिए प्रशासन व केंद्र सरकार सरकारी वकीलों की संख्या में बढ़ोतरी करे।