हरियाणा लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा में उर्दू को विषय के तौर पर शामिल न करने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार व अन्य को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मेवात निवासी मोहम्मद इमरान ने एडवोकेट मोहम्मद अरशद के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया कि संविधान आठवीं अनुसूची के तहत उर्दू को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा देता है। इस दर्जे के बावजूद प्रतियोगी परीक्षा में इसे वैकल्पिक विषय के रूप में मान्यता ना देना इससे भेदभाव है।
कई राज्यों में उर्दू मुख्य रूप से बोली जाती है और उर्दू बोलने वालों की देश में सवा छह करोड़ से अधिक संख्या है। संघ लोक सेवा आयोग में उर्दू विषय के रूप में शामिल है। एचसीएस परीक्षा के लिए मुख्य परीक्षा के विषयों की सूची में उर्दू को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल करने के निर्देश देने की मांग की है।
याची ने कहा कि वह उर्दू में पारंगत हैं और इसलिए वह वैकल्पिक विषय के रूप में उर्दू ले सकते हैं। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हरियाणा सरकार ने याचिका पर पक्ष रखने के लिए मोहलत देने की मांग की। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को मोहलत देते हुए अगली सुनवाई पर लिखित जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।