युवक की मार्च 2004 को हादसे में मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी व बच्चों ने मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी। ट्रिब्यूनल ने ये कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि मृतक की मां को पक्ष नहीं बनाया गया है। अब इस पर हाईकोर्ट का अहम फैसला आया है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि मोटर वाहन हादसे के लिए मुआवजा याचिका को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि किसी एक को पक्ष नहीं बनाया गया है।
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हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल फरीदाबाद के आदेश को रद्द करते हुए बीमा कंपनी को मृतक की विधवा व बच्चों को 5.82 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए मृतक की पत्नी ने बताया कि उसके पति की मार्च 2004 को वाहन हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद याची व उसके बच्चों ने मुआवजे के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दाखिल की थी और 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने इस आधार पर दावा खारिज कर दिया था कि याचिका में मृतक की मां को पक्ष नहीं बनाया गया है।
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट एक्ट एक कल्याणकारी कानून है और इसका उद्देश्य वाहन हादसे का शिकार होने वाले या उनके आश्रित को आर्थिक सहायता मुहैया करवाना है। तकनीकी आधार बनाकर इस प्रकार मुआवजे से इन्कार नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द करते हुए बीमा कंपनी को मुआवजा राशि जारी करने का आदेश दिया है।