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हाईकोर्ट ने कहा, जंगल और प्राकृतिक संसाधन नष्ट करने वाले अग्रिम जमानत के हकदार नहीं

Wed, 18 Nov 2020 01:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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कलेसर वन से खैर की लकड़ियों की तस्करी के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि जंगल और प्रकृतिक संसाधनों को नष्ट करने वाले अग्रिम जमानत की रियायत के हकदार नहीं हैं।

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याचिका दाखिल करते हुए जगाधरी निवासी महमूद ने हाईकोर्ट को बताया कि पुलिस ने 2 दिसंबर 2019 को खैर की लकड़ी की तस्करी के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। एक वाहन को पकड़ा गया था और पीछे आ रही टाटा 407 में खैर के वृक्ष मौजूद थे। याची को केवल पकड़े लोगों के बयान के आधार पर आरोपी बनाया गया है। 

याची का न तो तस्करी से कोई लेना देना है और न ही वह मौके पर मिला था। जमानत का विरोध करते हुए हरियाणा सरकार ने कहा कि याची ऐसे काम में पहली बार लिप्त नहीं है। इसी तरह के मामले उस पर पहले भी दर्ज हैं। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह से कोर्ट से तथ्यों को छुपाया जाना सही नहीं है। अभी वह टूल बरामद होने बाकी हैं जिनसे वृक्ष काटे गए और यह भी पता लगाना है कि खैर के यह वृक्ष किसी बेचने के लिए जा रहे थे। ऐसे में इस मामले में अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता है।

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