आपराधिक मामले में आरोपी की जमानत के लिए पासपोर्ट जब्त या सरेंडर करने के आदेश कोर्ट जारी नहीं कर सकता। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एयर इंडिया के पायलट की ओर से दाखिल याचिका पर यह बेहद अहम आदेश जारी किए हैं। इंडियन एयरलाइंस की गुड़गांव निवासी सीनियर पायलट अनीता भल्ला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ फंड के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया था।
याचिकाकर्ता ने जब ट्रायल कोर्ट से जमानत मांगी तो जमानत शर्तों में पासपोर्ट जमा करवाना भी शामिल कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता जब भी विदेश जाती है तो उसके लिए उसे अदालत की इजाजत लेनी पड़ती है। याची ने कहा कि वह जिस पेशे में है उसमें अक्सर ही विदेश जाना पड़ता है और ऐसे में यह शर्त हटाई जाए।
जस्टिस चौधरी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आपराधिक केस में आरोपी को जमानत दिए जाते समय पासपोर्ट सरेंडर करने के आदेश आम बात हो गई है। जबकि पासपोर्ट एक्ट के अनुसार पासपोर्ट सरेंडर करना या इंपाउंड करने का अधिकार सिर्फ पासपोर्ट अथॉरिटी को है। सीआरपीसी में इसका प्रावधान है लेकिन सीआरपीसी एक सामान्य एक्ट है और पासपोर्ट एक्ट विशेष एक्ट।
ऐसे में विशेष एक्ट सामान्य एक्ट के ऊपर होता है और ऐसे मामले में पासपोर्ट एक्ट ही लागू होता है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस भी अक्सर आरोपी का पासपोर्ट जब्त कर लेती है जबकि ऐसा नहीं किया जा सकता। अदालत और पुलिस को अगर किसी आरोपी के विदेश जाने का अंदेशा हो तो वह आरोपी के पासपोर्ट को सरेंडर किए जाने के लिए पासपोर्ट अथारिटी को अर्जी दे। पासपोर्ट अथॉरिटी आरोपी का पक्ष सुनने के बाद इस पर निर्णय ले सकती है कि आरोपी का पासपोर्ट सरेंडर किया जाए या नहीं।