मेवात निवासी कांस्टेबल अरशद हरियाणा पुलिस में 2012 में शामिल हुआ था। अरशद ने 12 वर्षों की सेवा में 42 बार ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का रिकाॅर्ड बनाया था। इसके चलते उसके 19 वेतन वृद्धि स्थायी रूप से रोक दिए गए थे और उसे चार बड़ी सजाएं दी गईं थीं।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने काले जादू से इलाज करवाने के लिए बिना बताए छुट्टी पर गए हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल की बर्खास्तगी के आदेश को बरकरार रखा है। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि अनुशासित बल में किसी भी तरह की लापरवाही या अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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मेवात निवासी कांस्टेबल अरशद ने बताया कि वह हरियाणा पुलिस में 2012 में शामिल हुआ था। 2023 में उसे आवश्यक कार्य से कहीं जाना था और उसने इसके लिए एक सप्ताह की छुट्टी ली थी। विभाग के अनुसार वह फिर 300 से अधिक दिनों तक बिना अनुमति ड्यूटी पर नहीं लौटा। याचिकाकर्ता ने चार्जशीट, शो काॅज नोटिस, बर्खास्तगी आदेश और अपील व पुनरीक्षण खारिज करने के आदेशों को चुनौती दी थी।
एक सितंबर 2023 को उसे निलंबित कर दिया गया। विभागीय जांच में अरशद को दोषी पाया गया। उसे 20 जून 2024 को बर्खास्त कर दिया गया। उसकी अपील 16 अक्तूबर 2024 को और पुनरीक्षण याचिका 21 फरवरी 2025 को खारिज कर दी गई।
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जांच में यह भी सामने आया कि अरशद ने 12 वर्षों की सेवा में 42 बार ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का रिकाॅर्ड बनाया था। इसके चलते उसके 19 वेतन वृद्धि स्थायी रूप से रोक दिए गए थे और उसे चार बड़ी सजाएं दी गईं थीं। अपीलीय अधिकारी ने यह भी पाया कि अरशद ने जानबूझकर विभागीय जांच में सहयोग नहीं किया और जादू-टोना जैसे असंगत कारणों के आधार पर मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किए।
जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता के आचरण को गंभीरतम कदाचार माना जा सकता है। याची ने बताया कि उसने अपने गैर हाजिर रहने को जायज साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज पेश किए थे। याची ने बताया कि वह एक तांत्रिक के जरिए काले जादू से इलाज करवा रहा था। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कहा कि याचिकाकर्ता अनुशासित बल का हिस्सा था और उसे नियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए था। सशस्त्र बल किसी भी अनुशासनहीन सदस्य को बर्दाश्त नहीं कर सकते।