एक साल की छोटी बच्ची के भविष्य को देखते हुए दंपति को तलाक की अनुमति देने से इनकार करने वाले जिला अदालत के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पलट दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अदालत हिंदू मैरिज एक्ट के प्रावधान के अनुसार ही फैसला दे सकती है और हिंदू मैरिज एक्ट में ऐसा प्रावधान नहीं है कि बच्चे के भविष्य को आधार बनाकर कोर्ट तलाक से इनकार कर सके।
जिला अदालत फिरोजपुर में एक दंपति ने तलाक के लिए याचिका दाखिल की थी। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक के लिए केस दाखिल किया था। उनका विवाह दिसंबर 2015 में हुआ था और इस विवाह से उनकी एक बेटी भी थी। जिला अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा था कि दोनों की एक छोटी बच्ची है और तलाक से उसका भविष्य खराब हो सकता है। यह दलील देते हुए जिला अदालत ने केस को खारिज कर दिया था।
इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला अदालत के फैसले को गलत करार दिया। कोर्ट ने कहा कि अदालत का काम कानून के अनुरूप फैसला करना है। इस मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए हिंदू मैरिज एक्ट के प्रावधान को नहीं देखा। छोटी बच्ची के भविष्य को देखते हुए फैसला सुनाया गया जो गलत है।
हाईकोर्ट ने कहा बच्ची के माता पिता को उसका भविष्य देखना है और यह उनका काम है। तलाक से जुड़े मामलों में इस प्रकार बच्चे के भविष्य को देखते हुए तलाक मंजूर न करने का फैसला अदालत नहीं सुना सकती है। यह उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ ही केस को वापस जिला अदालत भेजते हुए हिंदू मैरिज एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप सुनवाई कर फैसला लेने का आदेश दिए हैं।