पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के विभिन्न जिलों में रेत और बजरी के खनन के लिए खदानों की 27 दिसंबर को होने जा रही नीलामी पर रोक लगा दी। पंजाब की नई माइनिंग पॉलिसी को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के खिलाफ बताते हुए दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह आदेश जारी किए हैं।
याचिका विभिन्न खनन ठेकेदारों ने दाखिल की है जिन्हें पंजाब की नई खनन नीति के कारण उनको दी आवंटित खानों का समर्पण करना पड़ा था। याचिकाकर्ताओं के वकील आरपीएस बाडा ने बताया कि याचिका में दो आधारों पर सरकार की कार्रवाई को चुनौती दी गई। पहला सुप्रीम कोर्ट के अनुसार कान्ट्रैक्ट की शेष अवधि का लाभ याचिकाकर्ताओं को नहीं दिया गया है और सरकार तीसरे पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए याचिकाकर्ताओं द्वारा आत्मसमर्पण की गई खदानों की नीलामी करने जा रही है।
दूसरा आधार ये बनाया गया कि सरकार द्वारा विभिन्न जिलों के रेत और बजरी की नीलामी के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई लेकिन उसमें बहुत सारी खामियां हैं। कोर्ट में तर्क दिया गया कि माइनिंग एरिया का डिमार्केशन तक नहीं किया गया। इससे पर्यावरण पर भारी प्रभाव पड़ेगा है और प्राकृतिक संसाधनों में कमी के साथ ही अवैध और अनियंत्रित खनन में बढ़ोतरी होगी। सुनवाई के दौरान पंजाब माइनिंग विभाग के अफसर भी मौजूद थे और उन्होंने इस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए लिए समय दिए जाने की अपील की।