शहर के अधिकतर निजी स्कूलों की ओर से बच्चों को एनसीईआरटी की सस्ती पुस्तकों के स्थान पाठ्यक्रम में निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें शामिल करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है।
सुनवाई के दौरान प्रशासन की तरफ से मामले में जवाब न सौंपने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने मामले में यूटी प्रशासन से जवाब तलब किया था।
जस्टिस जीएस संधावालिया ने प्रशासन के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल को बुलाकर उन्हें 10 जनवरी को अगली सुनवाई पर हर हाल में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए।
नितिन गोयल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था की शहर के अधिकतर निजी स्कूल में बच्चों को एनसीईआरटी की सस्ती पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं।
जबकि तय कानून के अनुसार स्कूलों में वही पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी, जिन्हें शिक्षा विभाग रिकमेंड करेगा। बावजूद इसके छात्रों को एनसीईआरटी के स्थान पर निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता है, जिनकी कीमत एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुकाबले 10 गुना अधिक है।