हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि घटना के दिन अमृतपाल के नेतृत्व में 200-250 लोगों की भीड़ थाने के पास पहुंची थी और कानून को अपने हाथ में लेकर अपने साथियों को छुड़ाना चाहती थी। भीड़ हिंसक हुई और कई पुलिस अधिकारियों को गंभीर चोट पहुंचाई गई। इस घटना ने पूरे देश की आत्मा को झकझोर दिया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह मौके पर मौजूद नहीं थे, जबकि उनकी टावर लोकेशन उनका झूठ साबित करने को काफी है।
संवेदनशीलता जरूरी, वरना आम आदमी का विश्वास खत्म हो जाएगा
कोर्ट ने कहा वर्तमान मामले को संवेदनशीलता के साथ निपटाना जरूरी है, अन्यथा कानून वितरण एजेंसियों में आम आदमी का विश्वास खत्म हो जाएगा। यह न्यायालय अपनी संवैधानिक भूमिका से पीछे नहीं हट सकता और आम आदमी की पीड़ा से आंखें नहीं मूंद सकता। यह न्याय का मखौल होगा, अगर गंभीर आरोपों के बावजूद याचिकाकर्ताओं को जमानत पर रिहा कर दिया जाता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।