पंजाब पुलिस के निलंबित एआईजी मलविंदर सिंह को बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने एआईजी होते हुए खुद को आईजी विजिलेंस के रूप में पेश किया जो उसकी गलत मंशा जाहिर करता है और इस मामले में डीईओ का बयान बेहद अहम है। याची ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र से नौकरी हासिल करने वालों को ब्लैकमेल किया जो अपने आप में जमानत याचिका खारिज करने के लिए पर्याप्त है।
याचिका दाखिल करते हुए निलंबित एआईजी मलविंदर सिंह ने ढाई माह से हिरासत में होने की दलील देते हुए जमानत की मांग की थी। याची पर भ्रष्टाचार व पद के दुरुपयोग सहित अन्य धाराओं में विजिलेंस ब्यूरो ने पिछले साल अक्तूबर में मोहाली में मामला दर्ज किया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कॉलेज के क्लर्क-जसवंत सिंह ने अपने बयान में कहा कि सह आरोपी बलबीर सिंह उसे ब्लैकमेल कर रहा था और उसने एक लिफाफे में 15,000 रुपये लिए थे।
लिफाफे पर मलविंदर सिंह एआईजी लिखा हुआ था और इस दौरान मलविंदर सिंह मौके पर मौजूद थे। याचिकाकर्ता की सीडीआर लोकेशन सह-अभियुक्तों के साथ उस स्थान पर मौजूद पाई गई, जो उनकी उपस्थिति को दर्शाता है, और इशारा करता है कि वह फर्जी जाति प्रमाण पत्र के कारण लाभ प्राप्त करने के बारे में पता चलने पर व्यक्तियों को ब्लैकमेल कर रहा था। इस आधार पर याचिकाकर्ता जमानत का हकदार नहीं है।
जमानत नामंजूर करने का एक अन्य कारण जिला शिक्षा अधिकारी अर्चना महाजन का बयान है। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि याची ने खुद को उनके सामने आईजी विजिलेंस के तौर पर पेश किया था और राजपुरा के ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी दलजीत सिंह का जाति प्रमाण पत्र रिकॉर्ड मांगा था। हाईकोर्ट ने कहा कि एआईजी के रूप में तैनात याचिकाकर्ता का खुद को आईजी विजिलेंस बताना दुर्भावनापूर्ण इरादे को दर्शाता है, ऐसे में वह जमानत का हकदार नहीं है। न्यायमूर्ति चितकारा का यह भी विचार था कि याचिकाकर्ता की हिरासत लगभग ढाई महीने है जो कि लंबी नहीं है जो उसे जमानत देने का हकदार बनाती है।