पंजाब के हजारों करोड़ के ड्रग कारोबार मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीजीपी सिद्धार्थ चटोपाध्याय की एसआईटी की ओर से सौंपी गई चौथी सीलबंद रिपोर्ट खोलने से इन्कार कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जांच पर लगाई गई रोक हटाते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें दोहरा झटका दिया है।
हाईकोर्ट ने 2018 में पूर्व एसएसपी राजजीत हुंदल के ड्रग कारोबार में शामिल होने के आरोपों की जांच के लिए तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चटोपाध्याय, एडीजीपी प्रबोध कुमार और कुंवर विजय प्रताप की एसआईटी गठित की थी। एसआईटी ने हाईकोर्ट में चार सीलबंद रिपोर्ट दी थी, जो पिछले पांच साल से हाईकोर्ट में सीलबंद पड़ी थी। इन रिपोर्ट में से तीन को हाईकोर्ट ने 28 मार्च को खोल दिया था और पंजाब पुलिस को कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन चौथी रिपोर्ट खोलने से इन्कार कर दिया था।
इसे खोलने से पहले हाईकोर्ट ने पूर्व डीजीपी सुरेश अरोड़ा और दिनकर गुप्ता को पक्ष रखने को कहा था। दोनों डीजीपी ने इस चौथी रिपोर्ट पर आपत्ति देते हुए कहा था कि सिद्धार्थ चटोपाध्याय ने यह चौथी रिपोर्ट उनकी छवि खराब करने के लिए दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि चौथी रिपोर्ट पर केवल एसआईटी के मुखिया सिद्धार्थ चटोपाध्याय के हस्ताक्षर थे बाकी सदस्यों के नहीं। ऐसे में इसे खोलने और इस पर कार्रवाई का आदेश नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट के इस आदेश से डीजीपी सुरेश अरोड़ा व दिनकर गुप्ता को बड़ी राहत मिली है।
चटोपाध्याय के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जांच पर लगी रोक हटाई
हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की उस अर्जी को भी मंजूर कर लिया, जिसमें हाईकोर्ट से अपील की गई थी कि पूर्व चीफ खालसा दीवान के अध्यक्ष के बेटे इंदरप्रीत चड्ढा की आत्महत्या मामले में सिद्धार्थ चटोपाध्याय के खिलाफ जांच पर लगी रोक को हटाया जाए। हाईकोर्ट ने रोक का आदेश हटाते हुए पुलिस को जांच आगे बढ़ाने की छूट दे दी है। हाईकोर्ट का अभी इस मामले में विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है।