-अग्रिम जमानत की मांग को लेकर दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने की सिरे से खारिज
कहा-एनसीईआरटी में भ्रष्टाचार की परतें खोलने के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एनसीईआरटी एजुकेशन किट टेंडर के बावजूद भुगतान के लिए पैसे की मांग को लेकर दर्ज मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस विभाग के प्रमुख विजय पाल सिंह को जमानत देने से इन्कार करते हुए याचिका सिरे से खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि एनसीईआरटी में हो रहे घोटाले की परतें खोलने और अन्य अधिकारियों की भूमिका का पता लगाने के लिए याची से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
याचिका दाखिल करते हुए अंबाला निवासी विजय पाल सिंह ने बताया कि एनसीईआरटी के अधिकारियों ने टेंडर के बाद भुगतान इसलिए नहीं किया क्योंकि जीएसटी का भुगतान नहीं किया गया था। एजुकेशन किट सप्लाई को लेकर किसी भी प्रकार का कोई भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता है। इसके साथ ही यह भी बताया कि अभी तक का उसका करियर बेदाग रहा है और उसने पूरी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निभाई है। इस मामले में उसे रंजिशन फंसाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि एजुकेशन किट छात्रों के पास पहुंचाई जानी थी और इसमें भी बिल भुगतान के नाम पर 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। इस प्रकार के गंभीर आरोप की स्थिति में याची को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। खास तौर पर याची से हिरासत में पूछताछ इसलिए भी जरूरी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में एनसीईआरटी के और कौन से अधिकारी शामिल हैं।