पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के साढ़े सात लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस तथा न्यायिक अधिकारियों के समान 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता जारी करने के सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि हम डीए का बकाया जारी करने के लिए तय 30 जून की समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को 25 मई तक पूरा शेड्यूल देना होगा कि भुगतान कब और किस चरण में किया जाएगा।
हर बार वित्तीय संकट की दुहाई
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए का बकाया देने के खिलाफ नहीं है लेकिन वर्तमान समय में राज्य गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हर बार सरकार वित्तीय संकट की दुहाई देती है। यदि हालात इतने खराब हैं तो फिर पंजाब में वित्तीय आपातकाल क्यों नहीं घोषित कर दिया जाता।
8 अप्रैल को सिंगल बेंच ने पंजाब के सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस तथा न्यायिक अधिकारियों के बराबर 58 प्रतिशत डीए देने के आदेश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि समान परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच डीए को लेकर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
सिंगल बेंच ने अपने आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि 30 जून तक डीए का समस्त बकाया जारी किया जाए। इसी फैसले को चुनौती देते हुए पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट की डबल बेंच में अपील दाखिल की थी और फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि डबल बेंच ने सरकार की मांग को स्वीकार नहीं किया और साफ संकेत दिए कि कर्मचारियों के अधिकारों को केवल वित्तीय कठिनाइयों के आधार पर अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता। अदालत की टिप्पणी के बाद राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों में उम्मीद बढ़ गई है कि लंबे समय से लंबित डीए बकाया के भुगतान का रास्ता अब साफ हो सकता है।