करनाल निवासी अरविंद कुमार ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से दो अलग-अलग याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा व पंजाब सरकार को आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है। याची ने बताया कि हरियाणा व पंजाब में हजारों की संख्या में ट्रेवल एजेंट लोगों को स्टडी, वर्क वीजा, टूरिस्ट वीजा के माध्यम से विदेश भेजते हैं।
ट्रेवल एजेंटों के हाथों युवाओं को प्रताड़ित होने से बचाने के लिए निर्देश जारी करने की अपील को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस पेशे के लिए रेगुलेटरी बॉडी बेहद जरूरी है।
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हाईकोर्ट ने इन्हें जारी लाइसेंस की वैधता पर सवाल उठाते हुए याचिका पर हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
करनाल निवासी अरविंद कुमार ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से दो अलग-अलग याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा व पंजाब सरकार को आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है। याची ने बताया कि हरियाणा व पंजाब में हजारों की संख्या में ट्रेवल एजेंट लोगों को स्टडी, वर्क वीजा, टूरिस्ट वीजा के माध्यम से विदेश भेजते हैं। ऐसा करते हुए अक्सर दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया जाता है, जिसका नतीजा युवाओं को उन देशों में जाकर भुगतना पड़ता है।
याची ने बताया कि उसने विदेश मंत्रालय से आरटीआई से सूचना मांगी थी कि हरियाणा व पंजाब में कितने ट्रेवल एजेंटों को लाइसेंस जारी किया गया है। मंत्रालय से जवाब आया कि देश के किसी भी राज्य में किसी ट्रेवल एजेंट को उन्होंने ऐसा लाइसेंस जारी नहीं किया है। यह लाइसेंस संबंधित देश ही जारी कर सकता है। याची ने कहा कि इस जवाब से यह स्पष्ट है कि हरियाणा व पंजाब में जितने वैध ट्रेवल एजेंटों की सूची जारी की जाती है असल में वे वैध हैं ही नहीं। पंजाब में जहां यह सूची जिले का डीसी जारी करता है तो वहीं हरियाणा में डीजीपी क्राइम यह सूची जारी करते हैं।
आंकड़ें देते हैं गवाही
याची ने बताया कि 2017 से 2019 के बीच पूरे पंजाब में 2140 ट्रेवल एजेंट पर एफआईआर दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा तत्कालीन मंत्री ब्रह्म मोहिंद्रा ने विधानसभा में पेश किया था। हरियाणा में भी स्थिति कोई बेहतर नहीं है और डीजीपी के अनुसार 190 ट्रेवल एजेंटों के खिलाफ दर्ज मामलों में जांच जारी है।