अवैध खनन से जुड़े मामले में टिप्पर चालक की जमानत याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस अवैध खनन करने वालों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और इन लोगों की पुलिस से मिलीभगत के साथ खनन हो रहा है।
कोर्ट ने कहा कि यह बड़ी शर्म की बात है कि केवल गरीब लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई हो रही है और असल माफिया पुलिस की पकड़ के बाहर हैं। हाईकोर्ट ने रोपड़ के एसएसपी को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का आदेश दिया है कि खनन माफिया के लोगों को इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया और साथ ही स्थानीय एसएचओ को अगली सुनवाई पर हाजिर रहने का आदेश दिया।
रोपड़ के नंगल पुलिस स्टेशन में अवैध खनन को लेकर 27 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में खनन सामग्री वाहन में ले जाने के आरोपी टिप्पर ड्राइवर ने जमानत के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। याची ने कहा कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और न ही वह मौके से गिरफ्तार हुआ था। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को जांच में शामिल होने की शर्त पर जमानत दे दी है।
इस दौरान कोर्ट ने पुलिस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि देखने में आ रहा है कि अक्सर गरीब जेसीबी व टिप्पर ड्राइवर ही आरोपी बनाए जाते हैं और वे लोग पुलिस की पहुंच से दूर रहते हैं, जिनकी शह पर अवैध खनन हो रहा है। यह बहुत दुखद है कि पुलिस असल दोषियों को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया गया कि अब तक पुलिस यह पता लगाने में कामयाब नहीं हुई है कि अवैध खनन कार्य किसके कहने पर किया जा रहा था।
जस्टिस एनएस शेखावत ने रोपड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस रिपोर्ट में उन्हें बताना होगा कि क्यों अवैध खनन कार्य करने वाले व्यक्तियों को मामले में आरोपी के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया गया?