हाईकोर्ट ने मंत्री अनिल विज सहित हरियाणा सरकार से एक मामले में जवाब मांगा है। बता दें कि पानीपत की कष्ट निवारण कमेटी की बैठक के दौरान एनवायरमेंटल इंजीनियर के निलंबन आदेश जारी करने का मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। भूपेंद्र सिंह की याचिका पर हाईकोर्ट ने बैठक की अध्यक्षता करने वाले मंत्री अनिल विज सहित हरियाणा सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही हाईकोर्ट ने बैठक में लिए गए निर्णय पर कार्रवाई की दिशा में आगे न बढ़ने के भी आदेश दिए हैं।
याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के इंजीनियर ने बताया कि 22 मई को बलबीर सिंह ने वर्धमान स्पिनर्स के खिलाफ शिकायत सौंपी थी। इसके बाद 15 जून को उसने एक पत्र लिखकर कहा था कि वह शिकायत पर एक्शन नहीं चाहता है। यह मामला जिला कष्ट निवारण कमेटी के एजेंडा में शामिल कर लिया गया। इसी बीच याची ने वर्धमान स्पीनर्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया और 29 अगस्त को वहां जाकर सैंपल भी एकत्रित किए। इन सैंपल को हरियाणा राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को भेज दिया गया।
साथ ही वर्धमान स्पिनर्स को बंद करने की सिफारिश भी भेजी गई। बावजूद इसके 31 अगस्त को कष्ट निवारण कमेटी की बैठक के दौरान इसकी अध्यक्षता करने वाले मंत्री अनिल विज ने याची को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए। याची ने कहा कि कमेटी को ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वह किसी को निलंबित कर सके। याची ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के तहत इस कमेटी का गठन नहीं हुआ है। साथ ही विज ने यह आदेश जारी कर सर्विस रूल्स के प्रोविजन को बाइपास किया है।
याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि याचिका लंबित रहते उसपर किसी भी प्रकार की सख्ती पर रोक लगाई जाए। साथ ही विज द्वारा जारी किए गए आदेश को भी खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने याची का पक्ष सुनने के बाद अनिल विज, हरियाणा सरकार, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।