चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रेहड़ी-फड़ी लगाकर जीविकोपार्जन करने वालों के अधिकारों के संरक्षण करने के बजाय उनके खिलाफ मनमानी जुर्माने पर चंडीगढ़ के गृह सचिव, निगमायुक्त और उपायुक्त को नोटिस जारी कर चार अप्रैल को जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेश के बाद केंद्र सरकार ने 2014 में रेहड़ी-फड़ी के जरिये अपनी आजीविका कमाने वाले लोगों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए द स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट-2014 लागू किया था। याची ने यह मांग करते हुए कमेटी के गठन और वेंडरों को लाइसेंस जारी करने संबंधी आदेश जारी करने की गुहार लगाई गई थी। इसके तहत सभी प्रदेशों और केन्द्र शासित राज्यों को इस वर्ग के कल्याण के लिए नीति बनाने के आदेश दिए गए थे।
उन्हें स्ट्रीट वेंडिंग कमेटी का गठन कर ऐसे रेहड़ी फड़ी मालिकों का सर्वे करवाने सहित उनके लिए एक जगह सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेश के बाद भी चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम ने इसे लागू नहीं किया।
अब तक न स्ट्रीट वेंडिंग कमेटी का गठन नहीं किया गया बल्कि इन्हें अपनी जगहों से अकसर हटाने के साथ साथ 1000 रुपये तक का जुर्माना भी वसूला गया। हालांकि, इस मद में अधिकतर 500 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।