पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि किसी आरोपी को अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग समय रहते करना अनिवार्य है। एनडीपीएस के मामले में 180 दिन में चालान पेश न होने पर डिफॉल्ट जमानत के लिए तुरंत आवेदन जरूरी है। यदि अर्जी से पहले चालान दाखिल हो जाता है तो आरोपी का डिफॉल्ट जमानत का अधिकार समाप्त हो जाता है।
याचिका दाखिल करते हुए कुरुक्षेत्र के समाना निवासी रोशन लाल ने 30 अक्तूबर 2020 को दर्ज एनडीपीएस के मामले में जांच एजेंसी को चालान पेश करने के लिए 2 महीने का वक्त देने के 27 अप्रैल 2021 के आदेश को चुनौती दी थी। याची ने बताया कि यह आदेश जांच एजेंसी के निवेदन पर दिए गए थे लेकिन याचिकाकर्ता व उसके वकील को नोटिस नहीं दिया गया था। इसके बाद याची ने 13 मई 2021 को डिफॉल्ट जमानत याचिका दाखिल की थी जो खारिज कर दी गई। इस आदेश को याची ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जहां याचिका खारिज कर दी गई।
अब नए सिरे से याची ने जांच एजेंसी को दिए अतिरिक्त समय के 27 अप्रैल 2021 के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट ने याची की गैरमौजूदगी में आदेश जारी किया और तय प्रक्रिया का पालन किए बगैर जांच एजेंसी को 60 दिन का समय दे दिया।
हाईकोर्ट ने पाया कि याची को याची 28 अप्रैल से डिफॉल्ट जमानत का हकदार था लेकिन अर्जी 13 मई को दाखिल की गई थी। इससे पहले 7 मई को जांच एजेंसी ने चालान पेश कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि चालान दाखिल होने से पहले डिफॉल्ट जमानत का आवेदन जरूरी है। यदि चालान दाखिल होने के बाद अर्जी दाखिल की जाती है तो आरोपी का अधिकार समाप्त हो जाता है।