शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने युवती को 12 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने की अनुमति दे दी है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अवांछित गर्भ युवती के जीवन में रोजगार के अवसर समाप्त कर देगा और उसकी क्षमता को प्रभावित कर कर सकता है।
पटियाला निवासी 30 साल की युवती ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 12 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की थी। याची ने दलील दी कि आरोपी ने शादी के बहाने उसके साथ संबंध स्थापित करने के लिए सहमति ली और गर्भवती होने के बाद याची से दूरी बना ली। इसके बाद याची की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया।
याची ने कहा कि वह इस गर्भ को जारी नहीं रखना चाहती और ऐसे में उसे इसे गिराने की अनुमति दी जाए। दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि एक युवती का प्रजनन विकल्प का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अविभाज्य हिस्सा है और यह शारीरिक अखंडता का पवित्र अधिकार है। वर्तमान गर्भावस्था को जारी रखना याचिकाकर्ता को उस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति की लगातार याद दिलाती रहेगी जिसे उसने झेला है।
सभी तथ्यों का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माता कौशल्या सरकारी अस्पताल, पटियाला के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के प्रमुख को मेडिकल बोर्ड गठन कर याचिकाकर्ता की गर्भावस्था का चिकित्सीय समापन करने के लिए सभी आवश्यक उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भधारण के लिए मजबूर होने पर एक युवती को शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बच्चे के जन्म के बाद भी ऐसी गर्भावस्था के परिणामों से निपटने से याचिकाकर्ता पर अतिरिक्त बोझ पड़ता रहेगा, जिससे उसकी क्षमता प्रभावित होगी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता की अविवाहित स्थिति को देखते हुए, गर्भावस्था जारी रखने से याचिकाकर्ता और संभावित बच्चे दोनों को मनोवैज्ञानिक नुकसान हो सकता है।