Punjab And Haryana Highcourt
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ऐसे में सिंगल बेंच का यह फैसला सही नहीं है। अब चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने ये सभी केस वापस सिंगल बेंच के समक्ष भेजते हुए निर्देश दिए हैं कि वे इन सभी 54 याचिकाओं पर दोबारा सुनवाई करें और अलग-अलग तथ्यों के आधार पर उन पर सुनवाई करे। एक जैसे मामलों को वह चाहे तो एक साथ सुनवाई कर सकते हैं और नए सिरे से इन सभी याचिकाओं पर सरकार से जवाब मांगा जाए। साथ ही खंडपीठ ने सिंगल बेंच को इन सभी मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने के भी आदेश दे दिए हैं।
हरियाणा के बोर्ड, कारपोरेशन, यूनिवर्सिटी के कई कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कई कर्मचारी 20 से 30 साल से अस्थायी तौर पर कार्यरत हैं। इसके बावजूद उन्हें रेगुलर नहीं किया गया है। सरकार ने इन कर्मियों को यह कहते हुए रेगुलर करने से इनकार कर दिया था कि यह कर्मी जिस पद पर रेगुलर होने की मांग कर रहे हैं, उस पद की शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करते हैं।
सिंगल बेंच ने सरकार की इस दलील को खारिज करते हुए कहा था कि जो कर्मचारी इतने लंबे समय तक काम कर रहे हैं, उनके अनुभव को ही उनकी योग्यता माना जा सकता है। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के इस विषय के कई फैसलों का हवाला देते हुए सिंगल बेंच ने सभी अस्थायी कर्मियों को 1 फरवरी तक रेगुलर किए जाने के हरियाणा सरकार को आदेश दे दिए थे। सिंगल बेंच के इसी फैसले को हरियाणा सरकार ने डबल बेंच में अपील दायर कर चुनौती दी थी।
हरियाणा के एडवोकेट जनरल बीआर महाजन ने कहा कि सिंगल बेंच के फैसले के चलते 25 हजार से अधिक कर्मियों को बैक डेट से रेगुलर करना पड़ेगा, जो कि बहुत मुश्किल है। उन्होंने कहा कि सिंगल बेंच अगर सिर्फ याचिका कर्ताओं के मामले में फैसला देता तो भी ठीक था, लेकिन सिंगल बेंच का फैसला सभी पर लागू हो जाता। ऐसे में सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। खंडपीठ ने जनवरी में सिंगल बेंच के इस फैसले पर रोक लगा दी थी। अब इन सभी 54 याचिकाओं को वापस सिंगल बेंच के समक्ष सुनाई के लिए भेज दिया है।