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हाईकोर्ट ने साफ किया 447 अपर डिवीजन क्लर्कों की भर्ती का रास्ता, पढ़ें क्या है पूरा मामला

Wed, 05 Dec 2018 09:13 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बैंच के आदेश को पलटते हुए उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की ओर से की जा रही 447 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ कर दिया है। एकल बैंच ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में अपर डिविजन क्लर्कों की भर्ती के लिए जारी 20 मार्च 2017 के परिणाम को रद्द कर दिया था। 

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अब हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 447 पदों के लिए कुल योग्य उम्मीदवारों की संख्या 429 है, ऐसे में सभी योग्य उम्मीदवारों को नौकरी दी जा सकती है। इस पर सभी पक्षों ने सहमति जता दी और हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के आदेश जारी कर दिए। इस मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने साल 2016 में 447 अपर डिविजन र्क्लक की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। 

इस भर्ती के लिए एक ही विज्ञापन और एक ही परीक्षा की गई थी। लेकिन जब कमीशन ने इस भर्ती का परिणाम निकाला तो उसने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम व उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के लिए दो अलग अलग मेरिट लिस्ट तैयार कर दी। विज्ञापन में इसका कोई उल्लेख नहीं था कि दोनों की मेरिट लिस्ट अलग अलग होगी। इस मेरिट लिस्ट में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की मेरिट लिस्ट कम थी, लेकिन दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिस्ट बहुत हाई थी। 

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याचिकाकर्ता को दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की मेरिट लिस्ट में वेटिंग में रखा गया, जबकि अगर उसका नाम उत्तर बिजली वितरण निगम लिस्ट में होता तो वह मेरिट में होती और उसका चयन पक्का था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया था कि वो इस मेरिट लिस्ट को रद्द कर नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाने के आदेश दे। हाईकोर्ट की एकल बैंच ने मामले पर सुनवाई के बाद पाया था कि मामले में कमीशन ने गलती की है। जब एक ही विज्ञापन और परीक्षा आयोजित की गई तो मेरिट सूची भी एक ही होनी चाहिए थी।

इसलिए लगाई थी परिणाम पर रोक
सिंगल बेंच ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की भर्ती को मंजूरी देते हुए मेरिट के आधार पर पद भरने के आदेश दिए थे तथा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 230 पदों के लिए जारी परीक्षा परिणाम को खारिज करते हुए नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के आदेश दिए थे। इसके बाद सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच के सामने याचिका दाखिल की गई थी। जस्टिस महेश ग्रोवर पर आधारित डिविजन बेंच ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा था कि केवल दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के परिणाम को रद्द नहीं किया जा सकता। ऐसे में डिविजन बेंच ने पूरे परिणाम पर ही रोक लगा दी थी। 
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