याचिकाकर्ता को दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की मेरिट लिस्ट में वेटिंग में रखा गया, जबकि अगर उसका नाम उत्तर बिजली वितरण निगम लिस्ट में होता तो वह मेरिट में होती और उसका चयन पक्का था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से आग्रह किया था कि वो इस मेरिट लिस्ट को रद्द कर नए सिरे से मेरिट लिस्ट बनाने के आदेश दे। हाईकोर्ट की एकल बैंच ने मामले पर सुनवाई के बाद पाया था कि मामले में कमीशन ने गलती की है। जब एक ही विज्ञापन और परीक्षा आयोजित की गई तो मेरिट सूची भी एक ही होनी चाहिए थी।
इसलिए लगाई थी परिणाम पर रोक
सिंगल बेंच ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की भर्ती को मंजूरी देते हुए मेरिट के आधार पर पद भरने के आदेश दिए थे तथा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के 230 पदों के लिए जारी परीक्षा परिणाम को खारिज करते हुए नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने के आदेश दिए थे। इसके बाद सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच के सामने याचिका दाखिल की गई थी। जस्टिस महेश ग्रोवर पर आधारित डिविजन बेंच ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा था कि केवल दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के परिणाम को रद्द नहीं किया जा सकता। ऐसे में डिविजन बेंच ने पूरे परिणाम पर ही रोक लगा दी थी।